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जामवंत गुफा ,जम्मू
26 June-2022
मुबारक मण्डी हेरिटेज से वापस लौट रहे थे , बिश्नोई जी बोले कि चलिए एक और जगह दिखा के लाता हूँ। मुश्किल से एक या डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित पीर खो है ! जामवंत की गुफाएं भी कहते हैं इस जगह को ! तो अब हम पीर खो नहीं बल्कि जामवंत गुफा ही लिखेंगे आगे। इस गुफा में कई पीरों, फकीरों, और ऋषियों ने तपस्या की, इस कारण से इसका नाम पीर खोह् पड़ गया। डोगरी भाषा में इसे खोह् गुफा भी बोलते है।
कहते है कि श्री राम -रावण के युद्ध में जामवंत भगवान राम की सेना के सेनापति थे। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान राम जब विदा होकर अयोध्या लौटने लगे तो जामवंत जी ने उनसे कहा प्रभु युद्ध में सबको लड़ने का अवसर मिला परंतु मुझे अपनी वीरता दिखाने का कोई अवसर नहीं मिला। मैं युद्ध में भाग नहीं ले सका और युद्ध करने की मेरी इच्छा मेरे मन में ही रह गई।
उस समय भगवान ने जामवंत जी से कहा, तुम्हारी ये इच्छा अवश्य पूर्ण होगी जब मैं कृष्ण अवतार धारण करूंगा। तब तक तुम इसी स्थान पर रहकर तपस्या करो। इसके बाद जब भगवान कृष्ण अवतार में प्रकट हुए तब भगवान ने इसी गुफा में जामवंत से युद्ध किया था।
एक कथा के अनुसार राजा सत्यजीत ने सुर्य भगवान की तपस्या की तो भगवान ने प्रसन्न होकर राजा को प्रकाश मणि प्रसाद के रूप में दे दी। राजा का भाई मणि को चुराकर भाग गया पर जंगल में शेर के हमले में मारा गया और शेर ने मणि धारण कर ली। इसके बाद जामवंत ने युद्ध में शेर को हराकर मणि प्राप्त की। कृष्ण से हारने के बाद ये मणि जामवंत ने कृष्ण को दे दी।
Youtube Video Link : https://www.youtube.com/watch?v=20fV1oh7iYo&t=6s
यहीं से कृष्ण और जामवंत फिर से मिले। जामवंत ने कृष्ण को अपने घर आमंत्रित किया यहीं पर जामवंत ने कृष्ण के समक्ष अपने पुत्री सत्य भामां से विवाह का अनुरोध किया और दहेज स्वरूप प्रकाश मणि दी।
मंदिर प्रांगण उतरे तो बराबर में ही एक सुन्दर पार्क है और इस पार्क के एक कोने पर रोप वे का स्टेशन भी है। पता किया तो बताया गया कि ये रोप वे जामवंत गुफा से महामाया मंदिर तक जाती है और फिर महामाया मंदिर से बहु फोर्ट तक जाती है। उस वक्त यानि कि जून -2022 में , इसका किराया जामवंत गुफा से महामाया मंदिर तक 150 रुपए था और इतना ही महामाया मंदिर से बहु फोर्ट तक का था मगर आप एक साथ आने जाने का करेंगे तो ये 500 रूपये प्रति व्यक्ति हो जाता है।
मैं हालाँकि इस रोप वे में बैठा नहीं था मगर कल्पना करें तो जब ये तवी नदी और बहु गार्डन के ऊपर से होकर गुजरती होगी , अद्भुत दृश्य देखने को मिलता होगा। मुझे जानकारी नहीं थी तब और न उतना समय बचा था क्योंकि ये शाम छह बजे तक ही मिलती है और सुबह 11 बजे शुरू होती है। आपको मौका मिले तो जरूर आनंद लीजियेगा , अच्छा लगेगा !
थक चुका था मैं ! सुबह लगभग आठ बजे से ही घूमता फिर रहा था तो पार्क में एक जगह मैं और बिश्नोई भाई , कोल्डड्रिंक और चिप्स लेकर बैठ गए ! अन्धेरा होने में अभी कुछ देर बाकी थी मगर जैसे ही हल्का सा अँधेरा घिरने लगा , पार्क के एक कोने में लगी भगवान शिव की मूर्ति और उसके आसपास लगे फव्वारे चमक उठे। शिव की मूर्ति से निकलती जलधारा , माँ गंगा का रूप व्यक्त करती हुई प्रतीत होती हैं।
जैसे -जैसे शाम घिरने लग रही थी , भीड़ बढ़ती जा रही थी। ये ज्यादातर स्थानीय लोग थे जो अपने बच्चों के साथ पिकनिक मनाने आ रहे थे।
अब ऐसा कुछ जम्मू शहर में रह नहीं गया था जो मेरी लिस्ट में रहा हो और देख न पाया होऊं ! बल्कि जितना सोचा था उससे ज्यादा , बहुत ज्यादा देखने और घूमने का मौका मिल गया और ये सब संभव हुआ मित्र सूखराम बिश्नोई जी की वजह से ! धन्यवाद भाई जी !!
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