मंगलवार, 28 जुलाई 2015

ऋषिकेश से जोशीमठ : बद्रीनाथ यात्रा

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नीलकण्ठ महादेव मंदिर भले ऋषिकेश से 32 किलोमीटर की दूरी पर और 1330 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हो लेकिन गर्मी में कोई राहत नही मिलती। सूरज अपना पूरा रुतबा दिखाता है। लगभग साढ़े दस बजे भी ऐसा लग रहा था मानो दोपहर हो गयी हो। दर्शन करने के पश्चात गाडी को ढूंढते ढूंढते पसीना आ गया , एक किलोमीटर दूर खड़ी थी। दोपहर 2 बजे वापस ऋषिकेश पहुँचा ! बस स्टैंड के सामने ही कई सारे होटल हैं , 50 रुपया की थाली मिल जाती है। हाँ , दही के पैसे अलग से देने पड़े , 30 रुपया ! लेकिन कुल मिलाकर बढ़िया खाना हो गया 80 रूपये में। मेरी पसंद की भिन्डी की सब्जी और उसके साथ दही , बस खाना पूरा हो गया !! इतने में सामने एक बस लगी हुई दिखाई दी कर्णप्रयाग तक की। मुझे मालुम था कि मैं आज बद्रीनाथ नही पहुँच सकता, ज्यादा से ज्यादा दूरी तय करना चाहता था ताकि कल को जो कार्यक्रम तय किया हुआ है वो पूरा हो जाए ! प्राइवेट बस थी , मैंने पूछा कहाँ तक जाओगे ? बोला रुद्रप्रयाग तक ! लेकिन बोर्ड कर्णप्रयाग दिखा रहा है ? बोला -सवारी हो जाएंगी तो कर्णप्रयाग तक चले जाएंगे !! इस बीच चाय भी पी ली लेकिन बस अब भी वहीँ खड़ी थी  ! आखिर साढ़े तीन बजे स्टैंड से निकली और ये तय हो गया कि अब रुद्रप्रयाग से आगे नही जायेगी ! कोई बात नही , आज इधर ही डेरा डाल लेते हैं !! करीब साढ़े छह बजे रुद्रप्रयाग बस स्टैंड पर उतरकर सस्ते से रात्रि विश्राम की खोज की ! प्रयास रंग लाया और रुद्रप्रयाग के संगम के पास ही एक कमरा ले लिया ! किराया बताया 300 रुपया ! 250 में मामला बन गया ! पीछे की खिड़की से संगम का शानदार दृश्य दिखाई दे रहा था। थोड़ी देर में आरती भी शुरू हो गयी , कौन सी आरती थी नही मालुम क्योंकि दूर से आरती के दीपक तो दिख रहे थे आवाज़ नही सुनी जा सकती थी !!

रुद्रप्रयाग पञ्च प्रयागों में से एक है ! प्रयाग गढ़वाल क्षेत्र में स्थित नदियों के मिलन को को कहते हैं ! ये पांच प्रयाग हैं : देवप्रयाग , रुद्रप्रयाग, नंदप्रयाग , कर्णप्रयाग और विष्णुप्रयाग ! 

देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम है जो आगे गंगा बन जाता है ! रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मन्दाकिनी का मिलन होता है ! रुद्रप्रयाग शिव को समर्पित जगह है ! ऐसा माना जाता है कि रुद्रप्रयाग में नारद मुनि ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की और भगवान शिव यहां रूद्र अवतार में प्रकट हुए ! नंदप्रयाग अलकनंदा और नंदाकिनी का संगम स्थल है। अलकनंदा बद्रीनाथ से आगे सतोपंथ से आती है और नंदाकिनी नंदा देवी चोटी से निकलती है। नंदप्रयाग में ऐसा माना जाता है कि यहां राजा नन्द ने पत्थरों पर यज्ञ किया था और उन्हीं पत्थरों को यहां के मंदिर में प्रयोग किया गया है ! समुद्र तल से लगभग 870 मीटर की ऊंचाई पर बसा नंदप्रयाग कर्णप्रयग से 20 किलोमीटर की दूरी पर है !

कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदिया अपना संगम बनाती हैं ! और इस जगह को कर्णप्रयाग का नाम महाभारत के कर्ण की वजह से मिला जिन्होंने यहां भगवान सूर्य की उपासना की थी और सुरक्षा कवच प्राप्त किया था । और सबसे आखिर में बद्रीनाथ के पास विष्णुप्रयाग है जो अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम स्थल है। यहां नारद मुनि ने भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी तपस्या की थी !

रुद्रप्रयाग में सोने से पहले वहां के एक आदमी को बोल दिया था कि भाई मुझे सात बजे जगा देना लेकिन हुआ इसका उल्टा - कभी भी सात बजे से पहले न जगने वाला प्राणी आज छह बजे ही जाग गया था और जब वो आदमी जगाने आया तब तक तो नहा भी चुका था ! आठ बजे नाश्ता लेकर कर्णप्रयाग की बस ले ली और वहां उमा देवी मंदिर के दर्शन करने के पश्चात पिंडर और अलकनंदा के संगम के दर्शन किये। यहां पिंडर बिलकुल साफ़ सुथरी है और उसका पानी दूर से देखने पर हरीतिमा लिए हुए लगता है जबकि अलकनंदा बहुत मैली , कीचड से भरी हुई सी !


कर्णप्रयाग से बहुत देर हो गयी। जोशीमठ तक जाने के लिए कुछ भी नही मिल रहा था ! जो बस या गाड़ियां ऋषिकेश -हरिद्वार की तरफ से आ रही थीं वो सब पहले से बुक थीं और कोई रोक ही नही रहा था ! आखिर चमोली तक की बस में ही बैठना पड़ा ! और फिर चमोली से एक सूमो में जोशीमठ पहुँच गए ! अब जोशीमठ पहुँच गए तो उसने इधर ही उतार दिया ! मुझे आगे आज तपोवन जाना था ! किसी से पूछा तपोवन के लिए गाडी कहाँ से मिलेगी ? करीब एक किलोमीटर आगे जाना पड़ा ! उसी स्टैंड से बद्रीनाथ , गोविंदघाट ( हेमकुंड साहिब ) और तपोवन के लिए सूमो गाड़ियां मिलती हैं ! तो अब तपोवन चलेंगे ! लेकिन तपोवन की बात आपको अगली पोस्ट में सुनाएंगे ! तब तक इंतज़ार करिये ! इंतज़ार का फल मीठा होता है !


देव प्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी का संगम



नन्द प्रयाग से दूरियां


नन्द प्रयाग में अलकनंदा और नंदाकिनी का संगम








रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मन्दाकिनी का मिलन होता है

रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मन्दाकिनी का मिलन होता है

रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मन्दाकिनी का मिलन होता है



उमा मंदिर कर्णप्रयाग

उमा मंदिर कर्णप्रयाग

उमा मंदिर कर्णप्रयाग

उमा मंदिर कर्णप्रयाग



कर्णप्रयाग से दूरियां बताता साइन बोर्ड

कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदिया अपना संगम बनाती हैं

कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदिया अपना संगम बनाती हैं

कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदिया अपना संगम बनाती हैं


कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदिया अपना संगम बनाती हैं  
चमोली से दूरियां

जोशीमठ से दूरियां

और ये विष्णुप्रयाग में अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम



                                                                                                                 यात्रा जारी रहेगी :

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

Japanese Language Lesson -7

 अगर आप जापानी भाषा के इन पोस्ट को शुरू से पढ़ना चाहते हैं तो कृपया यहां क्लिक करिये !!


आज के जापानी भाषा के पाठ में महीना और सप्ताह के दिनों के विषय में बात करेंगे ! जापानी भाषा में भी 12 महीने होते हैं अंग्रेजी की तरह !! आइये सीखते हैं :


महीना - गात्सु

ये महीना -कोन गेत्सू

पिछला महीना - सेन गेत्सू

अगला महीना - राय गेत्सू

गेत्सू मात्सु - महीना का अंत

मान गेत्सू - पूर्णमासी


जनवरी यानि पहला महीना = इची + गात्सु = इची गात्सु

फरवरी = नी गात्सु
मार्च = सान गात्सु

अप्रैल = शी गात्सु

मई = गो गात्सु

जून = रोकू गात्सु

जुलाई = शीची गात्सु

अगस्त = हाची गात्सु

सितम्बर = कू गात्सु

अक्टूबर = जू गात्सु

नवंबर = 11 वां महीना = 10 +1 = जू + इची = जू ईची गात्सु

दिसंबर = जू नी गात्सु




यहाँ एक बात ध्यान देने की है ! महीना को गात्सु (gatsu ) कहते हैं और उसी के अनुसार जापानी गिनती के हिसाब से उसमें इची गात्सु , नी गात्सु बनाते हैं। गिनती आप को आती होगी !! नहीं तो आप यहां से सीख सकते हैं ! लेकिन अगले , पिछले ऐसे महीने की बात करनी है तो आपको गेत्सू (getsu ) कहना पड़ेगा ! समझ में आया आपके ? नही तो दोबारा समझें !!

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अब सप्ताह के दिनों के बारे में पढ़ते हैं !


दिन - यूबी

आज - क्यो

आने वाला कल - आशिता

बीता हुआ कल - किनो

रविवार -निची यॊबि

सोमवार -गेत्सू यॊबि

मंगलवार - का यॊबि

बुधवार - सुई यॊबि

गुरूवार - मोकू यॊबि

शुक्रवार - किन यॊबि

शनिवार - दो यॊबि

जन्मदिन - तांजोबी

महीने का कौन सा दिन - नानी यॊबि

कौन सा साल - नान्नेन


थोड़ी सी मुश्किल आ सकती है आपको दिनों के नाम याद रखने में , लेकिन जैसा कि आप देख रहे हैं सभी दिनों के मायने में यॊबि जरूर आ रहा है तो आपको उससे पहले वाले शब्द याद रखने होंगे जैसे मोकू , सुई .... इनके बाद यॊबि लगाएंगे तो सप्ताह का दिन बन जाएगा ! थोड़ा सा मुश्किल है , लेकिन जापानी भाषा दुनिया की मुश्किल भाषाओँ में ऐसे ही नही गिनी जाती ! थोड़ा मुश्किल लेकिन मजेदार !!


कोई सवाल हो तो लिखिए !!


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If you want to learn it from the starting , you may click here . 

Our today's japanese language lesson will be based on the names of months and week days in Japanese Language . There are 12 months in a year in Japanese language like English .


Month - gatsu


Kon getsu - This month

Sen getsu - Last Month

Rai getsu - Next Month

Getsu matsu - The end of the month

Man getsu - A full moon


ichi + gatsu = ichigatsu - January

ni + gatsu = nigatsu - February

san + gatsu = sangatsu - March

shi + gatsu = shigatsu - April

go + gatsu = gogatsu - May

roku + gatsu = rokugatsu - June

shichi + gatsu = shichigatsu - July

hachi + gatsu = hachigatsu - August

ku + gatsu = kugatsu - September

juu + gatsu = juugatsu - October

juu + ichi + gatsu = juuichigatsu - November

juu + ni + gatsu = juunigatsu - December


As you can see in the paragraph that japanese months are very simple to learn but you should know the countings in Japanese language.

eg

if you are talkinhg about July , it will be 7th month ,right ! 7 is shischi (never used nana for the month ) and month is gatsu , so in Japanese Language July will be shichi + gatsu = shichigatsu . got it ? Remember that for the counting of months we use a word "gatsu" but for special word "getsu" is used for next or previous month . It is clearly shown in the starting of the paragraph .



Day : Yoobi

today : kyoo

tomorrow : ashita

yesterday :kinoo

the day after tomorrow :asatte

the day after yesterday :ototoi

sunday:nichiyoobi

monday:getsuyoobi

tuesday:kayoobi

wednesday:suiyoobi

thursday:mokuyoobi

friday:kinyoobi

saturday :doyoobi

birthday : tanjoobi

what day of the month : naniyoobi

what year : nannen


yes ! to learn the names of wek days in japanese language you have to learn its prefix like nichi, getsu, ka......etc and then add yoobi to these prefix . Difficult ? may be . japanese is one of the difficult language to learn of the world. but interesting as well.



have you any querry ? most welcome.


                                                                                         

मंगलवार, 21 जुलाई 2015

नीलकण्ठ महादेव मंदिर :ऋषिकेश


इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए कृपया यहां क्लिक करें !!

ऋषिकेश बिलकुल सुबह ही पहुँच गया था। चाय पीकर सीधा त्रिवेणी घाट का टैम्पो पकड़ लिया। पूरा ऋषिकेश जैसे अभी सोया हुआ था बस वो ही लोग दिखाई दे रहे थे जो पूजा पाठ वाले थे। थोड़ी सी रौनक घाट पर जरूर दिखाई दी। स्नान किया ! गंगा स्नान ! बचपन में जब कभी पिताजी ने गंगा स्नान के लिए ले जाना चाहा , माँ तुरंत मना कर देती , अभी छोटा है ! फिर ये हुआ कि सालों गंगा को देखे बीत गए और अब अवसर मिल जा रहा है। बहुत ठंडा पानी और बहुत तेज धार। लेकिन वहां लगी हुई लोहे की जंजीरें नहाना आसान कर देती हैं। जय हो गंगा मैया की ! त्रिवेणी घाट से ऊपर आकर अब नीलकण्ठ जाना था। एक टैम्पो पकड़ा और राम झूला पहुँच गए। राम झूला को पार करके स्वर्गाश्रम होते हुए नीलकण्ठ के स्टैण्ड पहुँच गया। यहां से आपको सिर्फ महिन्द्रा या सूमो ही मिलती हैं और उनका एक तरह से यहां मोनोपोली है। 12 सवारी से कम पर जाएंगे नही और अगर कोई ग्रुप मिल गया तो आपको उतार देंगे , आप दुसरे से आ जाना ! लेकिन अच्छी बात ये है कि एक एक करके हर 5 मिनट पर एक गाडी निकलती है , कोई न कोई तो ले ही जाएगा अकेले को भी। आधा घंटे के बाद नंबर आया मेरा एक गाडी में। 2007 में आना जाना यानि दोनों तरफ का किराया 80 रुपया था अब 120 हो गया है। अच्छी खासी भीड़ होती है इन दिनों में , जो लोग ऋषिकेश आते हैं घूमने के लिए वो इधर भी आ जाते हैं। लगभग साढ़े दस बजे मैं नीलकंठ महादेव मंदिर पर था। यहाँ आने का प्रयोजन दूसरा था। यहां एक पीपल का वृक्ष है , कहते हैं इस पर लाल धागा बाँधने से मन की इच्छा पूरी होती है , तो मैंने भी 2007 में भगवान से एक इच्छा पूरी करने की अर्जी लगा दी और वो अर्जी स्वीकार भी हो गयी तो अब वो धागा खोल के आना था और एक और अर्जी देनी थी। दोनों काम कर आया ।


वहां गाड़ियों की इतनी भीड़ हो जाती है कि अगर आप थोड़ी देर से जा रहे हैं यानि 10 बजे के बाद तो आपको आपकी गाडी बहुत दूर पीछे ही रोक देनी पड़ेगी। पैदल चलते चलते पसीने आ गए। हाथ -मुंह धोकर मंदिर में प्रवेश कर रहा था कि उधर से एक जाना पहिचाना चेहरा दिखाई पड़ा ! ये वरिष्ठ पत्रकार एन.के सिंह जी थे ! आप जानते हैं उन्हें ? वो मुझे नही जानते लेकिन मैंने उन्हें कई बार टेलीविज़न पर होने वाली बहस में देखा है इसलिए पहिचानता हूँ ! मैंने तुरंत पूछा -आप एन.के सिंह जी ? थोड़ी सी बात चीत हुई ! उनकी धर्मपत्नी और उनकी बेटी साथ में थे ! सेल्फ़ी लेना भूल गया !!


अब ज़रा नीलकण्ठ महादेव के बारे में बात कर लेते हैं ! लगभग 5500 फीट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। विषपान के बाद विष के प्रभाव के से उनका गला नीला पड़ गया था और उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्थान करते हैं।


तो आइये फोटो देखते हैं !


त्रिवेणी घाट ऋषिकेश
त्रिवेणी घाट ऋषिकेश

जय गंगा मैया

जय गंगा मैया

राम झूला

राम झूला

जय नीलकण्ठ महादेव

जय नीलकण्ठ महादेव








ये किसानों की आजीविका


















कुछ फोटो ब्लर्ड हैं ! क्या कर सकता हूँ !


                                                                                                      आगे भी जारी रहेगी:

सोमवार, 20 जुलाई 2015

Japanes language Lesson -6

 अगर आप जापानी भाषा के इन पोस्ट को शुरू से पढ़ना चाहते हैं तो कृपया यहां क्लिक करिये !!

If you are interested to learn it from lesson -1 , please click here .





आज जापानी भाषा में वार्तालाप करने का तरीका सीखते हैं !
Today we will learn conversation in japanese Langauge . for English Version please scroll down .


मानिए कि आप जापान में हैं और आप भारत से हैं। आप स्वयं को पारितोष मान कर चलिए और जापानी व्यक्ति को यमादा मानिए , आइये शुरू करते हैं !! इस वार्तालाप में पहले मैंने हिन्दी वाक्य लिखे हैं और फिर उसका जापानी रूपांतरण किया है ।


लगभग सुबह के 10 बजे का समय है और आप रोड पर यमादा सान से मिलते हैं !!

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आप : (थोड़ा झुककर ) नमस्कार ! मेरा नाम पारितोष है। आपसे मिलकर प्रसन्नता हो रही है !!

आपका क्या नाम है ?

आप : थोड़ा झुककर ( सही तरीका फोटो में है ) !! कोनिचिवा ! हाजिमे माशिते। वाता शिवा पारितोष देस। दोज़ो योरोशिकु !!


ओ नमाए वा ?

यमदा : नमस्कार ! आपका नाम पारितोष है !! मैं यमादा हूँ ! मुझे भी आपसे मिलकर ख़ुशी हो रही है !!

यमादा : कोनिचिवा ! पारितोष सान ने !! हाजिमे माशिते। वाता शिवा यमादा देस। दोज़ो योरोशिकु !!



वाताशी वा : मैं 
हाजिमे माशिते जापानी भाषा का एक औपचारिक शब्द है और जब आप पहली बार किसी से मिलते हैं तब इसका प्रयोग करते हैं !!


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यमादा : आप कहाँ से हैं ?

यमादा : दोचीरा कारा देस ?

आप : मैं इंडिया से हूँ !!

आप : इन्दो कारा देस !

यमादा : ओह ! ऐसा है !

यमादा : सो देस का !!

आप : आप कहाँ से हैं ?

आप : दोको नी सुन्देमास का ?

यमादा : मैं टोक्यो से हूँ !!

यमादा : तोक्यो नी सुन्देमास !!


यहाँ दोचिरा कारा तब प्रयोग करते हैं जब आप दुसरे देश में हैं लेकिन जब आप अपने ही देश में हैं तब सुन्दे मास बोलते हैं । इसलिए यमादा सान सुन्दे मास बोल रहे हैं ।

इन्दो -इण्डिया

सो देस का - जब किसी बात को कन्फर्म करना हो तब ऐसा कहते हैं ।

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यमादा : आप क्या करते हैं ?

यमादा : ओषिगोतो वा ?

आप : मैं इंजीनियर हूँ !!

आप : एन्जिनिआ देस ।

यमादा : ऐसा !! मैं टीचर हूँ !!

यमादा : सो देस नै !! वाताशी वा क्योशी देस ।

यमादा : आपकी फैमिली में कितने सदस्य हैं ?

यमादा : कज़ोकू वा नान निन देस का ?

आप : मेरी फैमिली में तीन सदस्य हैं !!

आप : वाताशी वा कज़ोकु वा सान निन देस।

पिता जी , माता जी और मैं हैं !!

चीची तो हाहा तो वाताशी देस ।

यमादा : हाँ ! ऐसा !! बहुत ख़ुशी हुई !!

यमादा : हाय ! सो देस ने । दोज़ो योरोशिकु !!

आप : आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

आप : दोमो आरिगातो गोज़ाइमस !!


यहाँ आप देख रहे हैं कि बहुत से नए शब्दों का प्रयोग किया है ! जैसे

ओषिगोतो - कार्य

एन्जिनिआ - इंजीनियर

क्योशी - टीचर

नान निन - कितने सदस्य

तो - और

अगर आपकी फैमिली में तीन से ज्यादा सदस्य हैं तो आप उतना ही बताइये और इसके लिए आप गिनती यहां देख सकते हैं ! जैसे अगर पांच सदस्य हैं तो गो निन  कहिये !!


                                                                                               आगे जारी है :

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Let's learn Japanese language conversation today. you are Paritosh and you are in Japan . It is about 10 A.M. and you are on Road and met to Mr. Yamada , a native Japanese.

First I will write English Sentences and then japanese Sentences . Lets start :

You : Hello ! Myself is Paritosh . Nice to meet You !!
what is your name ?

You : Konnichi wa ! Hazime mashite ! watashi wa Paritosh desu (Pl.Read as des) . dozo yoroshiku !!
o ! namae wa ?

Yamada : Hello !! Paritosh !! Myself is Yamada !! Nice to meet you !!

yamada : Konnichiwa !! Paritosh saan ne !! Hazime mashite !! watashi wa Yamada desu . dozo yoroshiku !!








                               This is the right way of greetings in Japanese Culture . say Konnichi wa




word meaning :
watashi wa - I
hazime mashite is a formal word in japanese language which is used when two unknown persons meets first time.

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Yamada : From which country you are ?
Yamada : Dochira kara desu ?

You : I am from India .
You : Indo Kara desu.

Yamada : oh ! Thats Good !!
Yamada : so desu ka !!

You : from where you are ?
You : Doko ni sunde masu ka ?

Yamada : I am From Tokyo !
Yamada : Tokyo ni sunde masu.

Here Dochira kara is used only if you are from other country . but if you are in your home country then you should use "sunde masu" . as Mr. yamada is saying.

Indo -India
so desu ka - confirmation .

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Yamada : what is your profession ?
Yamada : oshigoto wa ? or oshigoto wa nan desu ka ?

You : I am an Engineer.
You : Enjinia Desu.

Yamada : so nice . I am a teacher .
Yamada : so desu ne. watshai wa kyoshi desu.

Yamada : How many members are in your family ?
Yamada : Kazoku wa nan nin desu ka ?

You : my family has three members . I , my mother and father. 
You : watashi no kazoku wan san nin desu. Watashi wa , haha wa to chichi wa.

Yamada : O great ! so nice ! Nice to meet you !
Yamada : Hai ! so desu ne !dozo yoroshiku !

You : Thank you so much !
You : domo arigato !!





W/M :
Oshigoto - Profession


enjinia- Engineer

Kyoshi - Teacher

Nan nin- How many peoples

to- and

If there are more family members in your family like 4, 5 ......then you should say accordingly and for these counting please click here.



                                                                                              Continue.....................
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बुधवार, 15 जुलाई 2015

​बद्रीनाथ यात्रा : गाजियाबाद से ऋषिकेश

जून का महीना ऐसे तो बहुत गर्मी लेकर आता है लेकिन मन में खुशियां भी लाता है। और दो लोगों के चेहरे तो चमक दमक से भरे रहते हैं। ये वो दो लोग कौन हैं ? जी एक तो बच्चे जिन्हे स्कूल से छुट्टियां मिल जाती हैं और दूसरे वो जो कॉलेज या स्कूल में नौकरी करते हैं , उन्हें भी बिना किसी झंझट के कुछ दिन तो ऑफ मिल ही जाता है। जैसे ही यूनिवर्सिटी के पेपर और प्रैक्टिकल का काम ख़त्म हुआ मैंने तुरंत अपना ब्रेक ले लिया। प्लानिंग पहले से ही थी कि बद्रीनाथ जाना है। ब्रेक बहुत सोच समझ कर लिया था , सोचा था 13 जून की शाम को गाज़ियाबाद से निकल जाऊँगा ऋषिकेश के लिए लेकिन उसी दिन कॉलेज में ही घर से फोन आ गया कि हमारी धर्मपत्नी जी के पूज्य पिताजी और हमारे ससुर जी की तबियत खराब हो गयी है और वो खुर्जा से गाज़ियाबाद पहुँच गए हैं और यशोदा अस्पताल में भर्ती हैं। अब इतना बुरा तो मैं नही हूँ कि वो बीमार हों और मैं वहां न होऊं। इसलिए कुल मिलाकर मैं शुक्रवार यानि 13 जून के बजाय सोमवार 16 जून को गाज़ियाबाद से ऋषिकेश के लिए निकल पाया। मुझे पैसेंजर ट्रेन से यात्रा करनी थी। उसका कारण ये था कि एक तो मेरे पास समय की कोई कमी नहीं थी और दूसरा मैं इस रूट को बेहतर समझना चाहता था और हर स्टेशन के फोटो भी खींचना चाहता था। हालाँकि मैं एक बार पहले भी 2007 में बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब गया हूँ लेकिन तब धर्मपत्नी साथ थीं इसलिए एक्सप्रेस ट्रेन से ही जाना पड़ा था।


दिल्ली- सहारनपुर पैसेंजर का गाज़ियाबाद स्टेशन पर निर्धारित समय 2 बजकर 15 मिनट का है लेकिन कभी भी ढाई बजे से पहले अपना मुंह नही दिखाती। उस दिन भी अपने रुतबे में ही रही और 2 बजकर 35 मिनट पर पहुंची। जगह मिलने का कोई मतलब ही नही था और जगह चाहिए भी नही थी क्योंकि फिर फोटो नही ले पाता। मेरठ सिटी स्टेशन पर जाकर जगह मिल गयी और अपनी पसंद वाली खिड़की वाली सीट कब्ज़ा ली। अब तक गाज़ियाबाद , नया गाज़ियाबाद , गुलधर , दुहाई हॉल्ट , मुरादनगर , मोदी नगर , मोहिउद्दीनपुर, परतापुर स्टेशन निकल चुके थे। अगला स्टेशन आया मेरठ सिटी और फिर मेरठ छावनी , ट्रेन आधी से ज्यादा खाली हो गयी। यहां एक कप चाय भी पी। अँधेरा शुरू हो गया था और छोटे छोटे स्टेशन एक एक कर निकल रहे थे -पाबली ख़ास , दौराला , सकौती टांडा , खतौली , मंसूरपुर। मंसूरपुर में चीनी मिल है और मोदी नगर और मोहिउद्दीनपुर में भी चीनी मिल है। ये पश्चिम उत्तर प्रदेश का बहुत ही उपजाऊ और धनी इलाका है लेकिन कुछ वर्षों से इधर आपसी वैमनस्य बहुत बढ़ गया है। ये पूरा इलाका गन्ने की खेती के लिए बहुत प्रसिद्द है इसीलिए यहां बहुत सी चीनी मिल हैं। निजी क्षेत्र की भी और सरकारी क्षेत्र की भी। मंसूरपुर से आगे का स्टेशन जरौदा नारा आता है और फिर मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर पहुँचते पहुँचते ट्रेन पूरा एक घण्टा देरी से चल रही थी लेकिन हमें क्या लेना ? हमें तो बस कैसे भी अभी सहारनपुर तक पहुंचना है और फिर ऋषिकेश। बामनहेड़ी , रोहना कलां , देवबंद , तल्हेरी , नांगल और टपरी जंक्शन होते हुए , रोते हुए आखिर लगभग रात को 9 बजे सहारनपुर पहुँच पाई ये दिल्ली सहारनपुर पैसेंजर। लेकिन जैसे ही प्लेटफार्म पर उतरा और बाहर निकलने लगा तो देखा,  पता नही कहाँ से भयंकर रैला चला आ रहा है लोगों का। किसी से पूछा आज कोई रैली थी क्या इधर ? नही भाई ! फिर ये भीड़ ? कल मावस ( अमावस ) है सब नहान के लिए हरिद्वार जा रहे हैं। ओह , इसका मतलब भीड़ से सामना होने वाला है हरिद्वार तक। सहारनपुर से हरिद्वार 80 किलोमीटर है। और सहारनपुर से ऋषिकेश के लिए पैसेंजर गाडी है रात को ग्यारह बजे। वो ही जो दिल्ली से आती है और गाजियाबाद पर शाम को छह बजे आती है। मैंने सोचा अगर ढाई बजे चलकर पैसेंजर ट्रेन रात को 9 बजे पहुँच रही है यानि साढ़े छह घंटे लगा रही है तब ये दूसरी वाली क्या उड़ के आ जाएगी ? खैर जब आएगी तब आ जाएगी अभी तो घर से लाया हुआ खाना खाते हैं और एक कप चाय पीते हैं। बैठने की थोड़ी जगह मिली तो खाना खोल लिया।


वापस स्टेशन लौटा तो पता चला दिल्ली से चलकर हरिद्वार के रस्ते ऋषिकेश को जाने वाली सवारी गाडी अपने निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से चल रही है। एक घंटा देरी से मतलब ये हुआ कि इसका निर्धारित समय है रात को 10 बजकर 50 मिनट और एक घंटा और मतलब 11 बजकर 50 मिनट। कोई मतलब ही नहीं कि साढ़े बारह से पहले पहुँच जाए। थोड़ा सा लेट मार लेता हूँ। थोड़ी देर बाद एक और घोषणा हुई , फलां फलां यानि यही वाली ट्रेन प्लेटफार्म संख्या 3 पर पहुँच रही है। प्लेटफार्म की घडी की तरफ देखा तो अभी तो 11 बजकर 55 मिनट हुए थे और गाडी समय पर आ पहुंची भले निर्धारित समय पर नही हो। अब यही ट्रेन सहारनपुर से ऋषिकेश हरिद्वार होते हुए जायेगी। भीड़ का रेला अपने पूरे जोश में था और इतना जोश में था कि लोगों को उतरने तक का मौका नही देना चाहता था। मैंने खिड़की से अपना छोटा सा बैग एक सिंगल सीट पर डाल दिया लेकिन इसका भी कोई ज्यादा फायदा नही हुआ और हरिद्वार तक एक आदमी के बैठने की सीट पर तीन आदमी बैठकर गए। सहारनपुर से निकलने के बाद बलिआखेड़ी , चुड़ियाला , इकबालपुर , रूड़की , ढंढेरा , लण्ढौरा , दौसनी और लस्कर जंक्शन निकल गए। इसमें रूड़की वो जगह है जहां आई आई टी है और जहाँ का सिविल इंजीनियरिंग का स्कूल कभी एशिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता था , अब क्या स्थिति है मुझे नही मालुम। लस्कर के बाद ऐथल , पथरी , इक्कर, ज्वालापुर और फिर हरिद्वार। हरिद्वार पर गाडी बिलकुल खाली हो गयी। और इतनी खाली हो गयी कि ऋषिकेश जाने वाले कुल तीन लोग थे डिब्बे में। उनमें से भी एक रायवाला उतर गया। आखिर मोतीचूर , रायवाला , वीरभद्र को पार करते हुए साढ़े पांच बजे ऋषिकेश पहुंचे। ऋषिकेश में हल्की हल्की बारिश हो रही थी जिससे मौसम सुहावना हो रहा था और ऐसे में जब आप आदमियों के समुद्र में से निकलकर आ रहे हों तब ऐसा मौसमऔर भी खुशगवार लगता है। 

आज इतना ही , अगली पोस्ट में ऋषिकेश के कुछ चुनिंदा दर्शनीय स्थल देखेंगे !! 







धन्यवाद सहित ये फोटो ब्लॉगर मित्र AJ  जी की है !!
धन्यवाद सहित ये फोटो जाने माने ब्लॉगर मित्र नीरज जाट की खींची हुई है !!

धन्यवाद सहित ये फोटो ब्लॉगर मित्र पवन गुप्ता जी की है !!








                                                                                                  

                                                                               उत्तराखंड यात्रा अभी शुरू हुई है , आगे भी जारी रहेगी


नीलकण्ठ महादेव मंदिर :ऋषिकेश 

ऋषिकेश से जोशीमठ : बद्रीनाथ यात्रा

जोशीमठ से तपोवन 

जोशीमठ से बद्रीनाथ जी 

बद्रीनाथ जी मंदिर

माणा : भारत का आखिरी गांव 

माणा से वसुधारा फॉल की ओर 

​वसुधारा फॉल :माणा 

वसुधारा से लौटते हुए !!