मंगलवार, 4 जून 2019

Feroz Shah Kotla Fort : Delhi

फिरोज शाह कोटला फोर्ट : 

दिल्ली की सर्दी जितनी खुशनुमा होती है , गर्मी उतनी ही कंटीली और जानलेवा होती है। हालाँकि दिल्ली की सर्दी भी 100-150 लोगों को हर साल अपने साथ यमराज के महल में ले ही जाती है ! सर्दी हो , गर्मी हो , बारिश हो , तूफ़ान हो , बाढ़ हो , आपदा हो , दंगा हो , भुखमरी हो ... कुछ भी हो लेकिन मरना गरीब को ही पड़ेगा ! गरीब वो भैंस है जो सिर्फ पांच साल में एक बार दूध देती है बाकी समय उस पर सिर्फ डंडे पड़ते हैं। जो पुलिस वाला किसी अमीर को सर-सर कहते हुए उससे दस कदम दूर चलता है वोही पुलिस वाला गरीब से डण्डा मार के 100 रूपये ऐंठ लेने में अपनी इज्जत समझता है। ध्यान रखिये - संविधान भी एक किताब ही तो है जिसमें लिखी हुई बातें भी कभी -कभी किताबी बातें ही सिद्ध होती हैं। आप सोच रहे होंगे आज ये कैसा ज्ञान बांटने लगा मैं ? ज्ञान जरुरी था क्यूंकि आज की पोस्ट उसी दिल्ली से है जिस दिल्ली ने कई बार अपने को बिखरते और फिर निखरते देखा है। 


14 वीं शताब्दी में भी दिल्ली में उथल -पुथल मची हुई थी जब फिरोज शाह तुग़लक़ को अपने चाचा मुहम्मद बिन तुग़लक़ से गद्दी मिली और गद्दी मिलते ही छोटे तुग़लक़ ने दिल्ली में त्राहिमाम मचा डाला। हिन्दू और जैन मंदिर तोड़ डाले गए और उनमें से निकली पत्थरों को ज़ामी मस्जिद और एक किला बनाने में लगा दिया। ये किला आज फ़िरोज़ शाह फोर्ट कहा जाता है। इसी किले में अम्बाला से लाकर लगाया गया अशोक स्तम्भ भी मौजूद है। यमुना किनारे एक नया शहर बसाया गया था जिसे फ़िरोज़ाबाद नाम दिया गया जिसकी सीमा पीर गायब से शुरू होकर पुराना किला तक जाती थी। फिरोज शाह तुग़लक़ को गद्दी 1351 ईस्वी में मिली और उसने 1384 तक शासन चलाया। इसी बीच में , या ये कहें कि अपने शासनकाल के शुरूआती तीन वर्षों में ही उसने इस किले का निर्माण पूरा करा दिया और अंततः 1354 में ये किला पूरी तरह बनकर दिल्ली के शहर फ़िरोज़ाबाद के शासन का केंद्र बन गया। फिरोज शाह कोटला फोर्ट को फ़ारसी में खुश्क ए फिरोज कहा जाता था जिसका मतलब था " फ़िरोज़ का महल" और इसे Irregular Polygon शेप में बनाया गया था जिसे मलिक गाज़ी और अब्दुल हक़ ने डिज़ाइन किया था। इस दुनिया में अजर-अमर कुछ नहीं और इसी बात को साबित करते हुए ये किला भी 1490 में तुग़लक़ सल्तनत खत्म होने के बाद अपनी दुर्दशा देखने लगा। 

क्यों जाएँ : आप कहेंगे कि खण्डहर है तो वहां क्यों जाना ? मुझे छोड़ दें , क्यों मुझे खण्डहर ही देखना पसंद है लेकिन आपके लिए वहां जाने का एक महत्वपूर्ण कारण वहां अशोक स्तम्भ का होना है जो मौर्या काल का 273 -236 BC का बना हुआ है और 13 मीटर ऊंचा है। इस पिलर को लगाने के लिए पिरामिड के आकार की एक मीनार बनाई गयी थी। जिस वक्त ये मीनार बनाई गयी होगी , सच में शानदार रही होगी और उस पर अशोक स्तम्भ ! क्या बात रही होगी ! जबरदस्त ! उस वक्त इस अशोक स्तम्भ को मीनार ए ज़रीन कहा गया था। अरे हाँ , एक और बात बता दूँ - दिल्ली में इसके अलावा एक और अशोक स्तम्भ भी है। इसके अलावा यहाँ त्रिस्तरीय ( Three Layered ) बावली भी देखने लायक है ! 

कैसे जाएँ : सबसे बेहतर है आप मेट्रो से दिल्ली गेट जाएँ और वहां से बाहर निकलकर बस 50 कदम और चलें। खूनी दरवाज़ा दिखेगा और उसी के सामने है फ़िरोज़ शाह कोटला फोर्ट ! 

टिकट : फोर्ट के बाहर चाय -पानी की दुकान हैं और पास में ही टिकट काउंटर है। 20 रूपये का टिकट लगता है !


















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सोमवार, 6 मई 2019

Different Types of Stoves used in Trekking & Camping

ट्रैकिंग और कैंपिंग में प्रयोग होने वाले स्टोव



जीवन की पहली ट्रैकिंग जून -2015 में बद्रीनाथ से माणा और फिर माणा से वसुधारा फॉल तक की थी। वसुधारा फॉल पर एक बाबा ने चाय पिलाई और जो चाय थी उसमें शंखपुष्पी के साथ -साथ कुछ और भी पड़ा था जिससे उसका रंग पिंक हो गया था। बस मैंने बाबा से उत्सुकतावश यही पूछ लिया -बाबा ? चाय का रंग पिंक सा लग रहा है कुछ !! और बाबा भड़क गए ! बोले अँगरेज़ की औलाद हो ? कितना पढ़े हो ? गुलाबी नहीं बोल सकते !! अब बाबा को पढ़ाई का बता के इंजीनियरों को और गाली दिलवाता इससे बढ़िया ये कहके पीछा छुड़ाया कि बाबा आठवीं फेल हूँ और पढ़े लिखे लोगों से सीखा है कि गुलाबी को पिंक बोलते हैं। बाबा कुछ ठण्डा हुआ और इस मस्के का फायदा ये हुआ कि बाबा एक और गिलास भरके गर्मागर्म चाय बना लाये !! डिग्री कौन सी गले में लटका के घूमनी है !! वसुधारा फॉल गए और सात -साढ़े सात बजे तक वापस बद्रीनाथ लौट आये ! ये थी पहली ट्रैकिंग करीब 16 किलोमीटर की ! चाय -पराठा सब माणा में हो गया था। 

फिर जून आया लेकिन साल बदल गया और अब 2016 की जून की गर्मी में फिर बद्रीनाथ पहुंचे और इस बार लम्बा चौड़ा अनुभवी लोगों का ग्रुप था ट्रेकिंग के लिए। सतोपंथ -स्वर्गारोहिणी का 6 दिन का ट्रेक जिसमें राशन -स्टोव -टेंट -स्लीपिंग बैग ले जाना था और पहली बार रात में भी पहाड़ों में ही रुकना था। बहुत कुछ सिखाया इस ट्रेक ने , टेंट लगाना , गुफा में रहना , केरोसिन आयल के स्टोव का Use , रास्ता पहचानना। बहुत कुछ ! और जबरदस्त अनुभव लेकर लौटा मैं। 

जून -2017 ! अमित तिवारी जी का कॉल और मैं तैयार फिर से। इस बार नंदीकुंड के लिए तैयारी करनी थी। रास्ते में 5300 मीटर ऊंचा विनायक दर्रा पार करना था इसलिए तिवारी जी का पैमाना सख्त था , वो ही लोग जाएंगे जिन्होंने पहले 4000 + मीटर का ट्रेक किया हुआ होगा ! बस मैं और अमित तिवारी जी , आखिर में हैदराबाद के श्रीकांत मिल गए। यहाँ दर्रे को पार करना सीखा , बर्फ में चलना सीखा और उतरते हुए घुटना टूटने का डर देखा। यहाँ भी राशन , स्टोव , टेंट , स्लीपिंग बैग का उपयोग किया। 

अब फिर जून -2018 ! आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा ! रास्ते में पड़ने वाले गाँवों में रुकने और खाने की समुचित व्यवस्था मिलती रही इसलिए कुछ भी ले जाने की जरुरत नहीं थी। हाँ , ड्राई फ्रूट्स , नमकीन , बिस्कुट , गर्म कपड़े।, दवाइयाँ वो सब हर बार की तरह लेकर ही गए। 

अब है मई और जून -2019 आने वाला है। इस जून में नेपाल के अन्नपूर्णा बेस कैंप (ABC ) , मचापुचारे बेस कैंप ( MBC) , तिलिचो लेक बेस कैंप ( TBC ) और मुक्तिनाथ मंदिर की यात्रा / ट्रैकिंग करने का विचार है। इस ट्रैकिंग में भी हम टेंट , स्लीपिंग बैग , पैक्ड फ़ूड ले जाना चाहते हैं और चाय / कॉफ़ी / सूप / मैग्गी बनाने के लिए स्टोव और फ्यूल भी ले जाएंगे। हमें केरोसिन आयल वाला स्टोव नहीं लेकर जाना है इसलिए मैं कुछ और Options सर्च कर रहा था और जो कुछ मेरी आँखों के सामने से गुजरा , मुझे लगा आप सब लोग जो पिकनिक / कैंपिंग , ट्रैकिंग करते हैं , उनके लिए स्टोव और फ्यूल का चुनाव करना एक बड़ी प्रॉब्लम होती है तो कुछ ऐसा एक जगह Compile किया जाए जिससे सबको फायदा मिल सके ! आइये देखते हैं कैसे -कैसे स्टोव उपलब्ध हैं और हाँ ऐसा स्टोव भी उपलब्ध है जिससे आप अपने Electronic Gadgets को भी चार्ज कर सकते हैं :


Kerosene Oil Stove (केरोसिन स्टोव ) : पहले जब एलपीजी नहीं हुआ करती थी तब घर की महिलाएं कोयले वाली अंगीठी या केरोसिन आयल / मिटटी का तेल , वाले स्टोव पर ही खाना बनाया करती थीं। गाँवों में तो लकड़ी और उपले वाले चूल्हे जलते थे और मुझे याद है कि हम सब भाई बहन चूल्हे के पास ही बैठ जाते थे खाना खाने को। खैर अब चूल्हा भी लगभग खत्म और ये स्टोव भी। हालाँकि हमने इस स्टोव को दो बार Use किया है तो इसके फायदे नुक्सान की बात कर लेते हैं :

Merits  : 
* केरोसिन आयल सस्ता पड़ता है। 
* आसानी से मिल जाता है। 
* ऊंचाइयों पर जमता नहीं है। 

Demerits : 
* स्टोव बल्की होता है और ले जाने में मुश्किल होती है 
* केरोसिन आयल अब हर जगह मिलता भी नहीं है 
* खाने में केरोसिन आयल की महक आती है 



Wood Stove ( Fuel -Wood ) : वुड स्टोव (फ्यूल -वुड ) :
वुड स्टोव को अगर Controlled Way  में यूज किया जाए तो ये कैंप फायर की तरह दिखता है। इसमें पत्ते , छोटी-छोटी लकड़ियां जला सकते हैं और ये फ्यूल आप ट्रैकिंग करते हुए इकठ्ठा करके ले जा सकते हैं। आपको पहले से कोई फ्यूल लेकर नहीं जाना होता है और जितने दिन चाहें आप रुक सकते हैं। इस स्टोव की बनावट आसान है जिसमें दो चैम्बर बने होते हैं। ऊपर आप लकड़ी जलाते हैं और नीचे के चैम्बर में फायर स्टार्टर रखते हैं। फायर स्टार्टर में आप सूखी पत्तियां , सूखी घास , कागज़ आदि यूज कर सकते हैं। आग जलाइए , ऊपर लकड़ियां रखते जाइये और खाना बनाइये , प्यार से परोसिये ! नए स्टाइल के वुड स्टोव और भी बेहतर हैं जिनमें खाना बनाने के साथ -साथ हीट और लाइट भी प्रदान करते हैं और Biolite का वुड स्टोव तो इससे भी आगे है जो हीट से इलेक्ट्रिक करंट Generate करता है और आपके Electronic Gadgets को चार्ज भी करता है। वुड स्टोव का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसका फ्यूल आसानी से और मुफ्त में मिल जाता है। लेकिन दिक्कत ये है कि भारत में हिमालय रेंज में ट्री लाइन लगभग 2500 मीटर की ऊंचाई पर पहुँचते -पहुँचते खत्म होने लगती है , इसलिए लकड़ी नहीं मिल पाती या फिर आपको नीचे से ही पर्याप्त मात्रा में लकड़ी इकट्ठी करके ले जानी पड़ेगी। 

Merits  : 
* Use करना आसान है 
* पैक्ड फ्यूल की जरुरत नहीं पड़ती 
* जलते समय आवाज नहीं करता 
* फ्यूल की कोई लीकेज / बर्बादी नहीं होती 
* और Camp Fire  का मजा मिलता है 

Demerits : 
* ट्री लाइन के ऊपर काम नहीं करेगा 
* मानसून में लकड़ी गीली हो जाने पर काम नहीं करेगा
* एफिशिएंसी फ्यूल पर निर्भर करती है 
* पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है 



Biolite wood burning stove with its integrated USB charger. By BioLite [CC BY-SA 3.0 us], via Wikimedia Commons 

Canister Stove : Fuel - Butane & Propane Gas :  कैनिस्टर स्टोव Propane  और Butane गैस के मिक्सचर पर काम करता है। इस में एक स्टोव होता है और Butane & Propane गैस का सिलिंडर होता है। स्टोव को सिलिंडर में फिट करने के तौर तरीके के आधार पर Canister Stove  को दो कैटेगरी में बाँट सकते हैं : 1 . Upright Stove (अपराइट स्टोव )  - इसमें गैस सिलिंडर में इस स्टोव को चूड़ियों से कस दिया जाता है जबकि दूसरी तरह के 2. Low Profile Stove - में एक Hose Pipe, Use किया जाता है। कनस्तर स्टोव साइज में छोटे , हल्के और Easy to Use के साथ -साथ एकदम सुरक्षित होते हैं। बस नॉब खोलो , माचिस दिखाओ और खाना बनाओ। जैसे घर में करते हैं। कुछ स्टोव Piezo Igniter (पीजो इग्निटर ) के साथ भी आते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि नॉब से आप फ्यूल की इंटेंसिटी को कण्ट्रोल कर सकते हैं। और क्यूंकि सिलिंडर एकदम सील्ड होता है इसलिए फ्यूल रिसने का भी कोई चांस नहीं। बेस्ट है ये मेरे हिसाब से। 

Upright Stove



Low Profile Stove

कनस्तर स्टोव फ्यूल में प्रोपेन और Butane या Iso Butane का मिश्रण उपयोग में लाया जाता है और इसे यूज़ करने के पीछे दो कारण हैं : पहला - रूम टेम्परेचर पर Butane , प्रोपेन से ज्यादा स्टेबल होता है और इसे आसानी से और सुरक्षित तरीके से लाइटवेट सिलिंडर में पैक किया जा सकता है , दूसरा - प्रोपेन करीब -41 डिग्री पर Vaporize होता है जबकि Butane जल्दी Vaporize हो जाता है। इसका मतलब ये हुआ कि आप एक्सट्रीम कोल्ड में भी इसे यूज कर सकते हैं। ज्यादातर सिलिंडर में 10 से 30 % तक प्रोपेन गैस मिलाई जाती है Butane के साथ। 



An upright canister stove, showing the proprietary fuel canister and stove. By Mikael Korpela (Own work) [CC BY-SA 3.0 or GFDL], via Wikimedia Commons 

Merits  : 
* तुरंत ही इसका उपयोग कर सकते हैं 
* छोटा और हल्का होता है 
* आवाज नहीं करता 
* बर्तन पर कालिख नहीं छोड़ता 
* नॉब से आग की तीव्रता को कण्ट्रोल कर सकते हैं 

Demerits  : 
* ज्यादा ऊंचाई पर हवा की स्पीड भी तेज होती है , अमूमन 60 कम /हायर जिससे इस स्टोव को कवर करना होता है और बहुत सारा फ्यूल Unused चला जाता है। हालाँकि कुछ स्टोव कवर और अपने ही पॉट के साथ आते हैं। 
* रिफिल हो जाता है लेकिन रिफिलिंग सेंटर बहुत कम मिलते हैं , इसलिए एक बार यूज करने के बाद फेंकना ही होता है जिससे पर्यावरण को नुक्सान होता है 
* महंगा पड़ता है 
* सिलिंडर के अंदर बचे हुए फ्यूल की मात्रा का पता नहीं चल पाता  


Solid Fuel Stove : Fuel - ESBIT Hexamine 
सॉलिड फ्यूल स्टोव , द्वितीय विश्व युद्ध में विकसित किये गए थे जिससे सैनिकों को गर्म खाना और चाय /कॉफ़ी मिल सके। इसमें ESBIT यानि Hexamine फ्यूल Use किया जाता है जो धुआंरहित , हाई एनर्जी फ्यूल माना जाता है। Hexamine की 15 ग्राम की टिकिया आती है जो करीब 12 मिनट तक जलती है और आधा लीटर पानी गरम कर देती है। इसका जो स्टोव होता है वो बहुत ही साधारण और हल्का होता है। इसमें बस आपको स्टोव खोलना है , ESBIT की टेबलेट रखनी है , माचिस से टेबलेट को आग जलानी है और हो गया काम ! आसान है न ? लेकिन इसके साथ एक दिक्कत है कि Hexamine जलते समय दुर्गन्ध छोड़ता है और बर्तन को काला भी करता है और भारत में ESBIT की टेबलेट्स आसानी से मिलती भी नहीं है इसलिए इनकी जगह अल्कोहल या कपूर की टेबलेट्स का उपयोग करते हैं। कपूर या पैराफिन की Tablets आसानी से मिल जाती हैं। हमारे यहां Caters भी खाना गरम बनाये रखने के लिए इनका यूज करते हैं। ये स्टोव हल्के होते हैं और कुछ नए डिज़ाइन के स्टोव में आग की तीव्रता को रेगुलेट भी किया जा सकता है। 

Merits : 
* एकदम हल्का और छोटा स्टोव होता है 
* इसका फ्यूल यानी कपूर की टेबलेट्स ज्यादा महँगी नहीं होतीं 
* पूरा सिस्टम सस्ता पड़ता है 
* फ्यूल को रखने के लिए कुछ अलग इंतेज़ाम नहीं करने होते 

Demerits : 
* आग की तीव्रता ज्यादा नहीं होती मतलब स्लो कुकिंग होती है 
* आग की तीव्रता को घटाया / बढ़ाया नहीं जा सकता 
* बर्तन पर कालिख छोड़ती है 
* ESBIT फ्यूल भारत में नहीं मिल पाटा जिसके वजाय कप्पोर का उपयोग करना पड़ता है 
* कभी -कभी पूरा फ्यूल नहीं जल पाता  !



पढ़िए और अगर आप कुछ कहना चाहें तो आपका बहुत स्वागत !!

मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

Adi Kailash Yatra at your own

अपने स्तर से आदि कैलाश यात्रा कैसे करें


Date : 16 April 2019

Journey Date : June 2018

इस दुनियां में कुल पांच कैलाश की उपस्थिति मानी जाती है जिनमें श्रीखंड महादेव , मणिमहेश , किन्नर कैलाश और आदि कैलाश भारत में हैं जबकि कैलाश मानसरोवर तिब्बत में है । आदि कैलाश , कैलाश मानसरोवर की प्रतिकृति ( Replica ) है इसलिए इसे कभी -कभी "छोटा कैलाश " भी कहते हैं।  हम जैसे जो लोग कैलाश मानसरोवर नहीं जा पाते वो भारत के उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ के जौलिंगकोंग स्थित "आदि कैलाश " के दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ मान लेते हैं।  नोट करिये इस बात को कि इस यात्रा में न आपको टैण्ट चाहिए और न स्लीपिंग बैग। हालाँकि हमने स्लीपिंग बैग गुंजी तक लादा था लेकिन हमने जो गलती की वो आप मत करना। अपने बैग में गर्म कपडे , रेन सूट , पानी की बोतल और कुछ खाने -पीने के सामान के अलावा और कुछ मत रखना। कोई जरुरत नहीं !! 


अब आते हैं आदि कैलाश यात्रा पर। और सबसे पहले बात करेंगे कौन -कौन से डॉक्यूमेंट की आपको जरुरत पड़ेगी। आदि कैलाश और ॐ पर्वत दोनों ही भारत -तिब्बत की सीमा के नजदीक पड़ते हैं इसलिए मूल निवासियों के अलावा अगर वहां कोई जाता है तो उसे SDM -धारचूला से परमिशन लेनी होती है जिसे इनर लाइन परमिट कहते हैं। इनर लाइन परमिट पर उन स्थानों के नाम लिखे होते हैं जहां आप जा सकते हैं और समयावधि भी लिखी होती है। आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा के लिए अधिकतम 18 दिन का इनर लाइन परमिट मिलता है और अगर आप इससे ज्यादा दिन रुकते हैं या इनर लाइन पास में लिखे स्थानों के अलावा और कहीं जाते हैं तो उत्तराखंड पुलिस और ITBP आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर सकती है। 

इनर लाइन पास के लिए आपको अपने लोकल पुलिस स्टेशन से PCC (पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट ) लेकर जाना होता है , मतलब चरित्र प्रमाण पत्र ! ये इस बात का प्रमाण होता है कि आपके ऊपर कोई केस तो नहीं चल रहा ? PCC लेकर सीधे धारचूला के राजकीय अस्पताल में जाइये वहां मेडिकल की फॉर्मेलिटी कराइये । बस 11 रूपये की सरकारी पर्ची कटाइये  , 10 मिनट में आपका मेडिकल सर्टिफिकेट मिल जाएगा। ध्यान  रखियेगा कि मेडिकल सर्टिफिकेट सिर्फ धारचूला का ही चलेगा। अब आप इनर लाइन पास के लिए जा रहे हैं तो कुछ चीजें चेक करिये :

1 . Police Clearance Certificate (PCC)
2. पहिचान पत्र (original )-Adhar Card  + ज़ेरॉक्स कॉपी
3 . Medical Certificate (Original )
4 . Affidavit ( वहीँ SDM ऑफिस के पास नोटरी बैठता है वहां से बन जाता है कुछ पैसे देकर )
5 . चार (4) पासपोर्ट साइज के फोट
6 . आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा का फॉर्म

ये सब चीजें लेकर आप SDM ऑफिस चले जाइये , आपको कुछ देर के बाद इनर लाइन पास मिल जाएगा और आप बिना हिचक अपनी आदि कैलाश यात्रा शुरू कर पाएंगे। SDM ऑफिस में आपका ओरिजिनल पहिचान पत्र जमा करा लिया जाएगा और आप जब यात्रा समाप्त करके लौटेंगे तब अपना इनर लाइन पास दिखाकर उसे वापस ले सकते हैं। इनर लाइन पास ही इस यात्रा में आपका सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होने वाला है इसलिए इसे बहुत संभालकर रखें। जहाँ -जहां आप जाएंगे , आपसे जाते हुए और आते हुए आपका इनर लाइन पास देखा जाएगा और आपका आने और वहां से जाने का समय रजिस्टर में नोट किया जाएगा। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये.....Adi Kailash Yatra - Preaprations Before Start

हम अपनी यात्रा को दिल्ली से शुरू करेंगे और फिर लौटकर दिल्ली में ही समाप्त करेंगे। यहां एक बात बतानी और जरुरी है कि आदि कैलाश यात्रा और ॐ पर्वत यात्रा को उत्तराखंड सरकार का उपक्रम कुमायूं मंडल विकास निगम लिमिटेड (KMVN ) भी हर साल आयोजित कराता है और उसके अलग अलग जगह से यात्रा शुरू करने के अलग -अलग पैकेज होते हैं जैसे दिल्ली से दिल्ली - 40,500 रूपये , काठगोदाम से काठगोदाम 35,500 रूपये और धारचूला से धारचूला 30,500 रूपये लेकिन हमने जो यात्रा की थी वो अपने स्तर पर की है मतलब प्राइवेट , जिसमें अपने स्तर से रास्तों की जानकारी जुटाना , रहने -खाने का इंतेज़ाम खुद करना। मतलब अपनी मर्जी के मालिक ! और आश्चर्यजनक रूप से हमारी यात्रा KMVN की तुलना में बहुत , मतलब बहुत सस्ती रही। संभव है हमें वो लक्ज़री न मिल पाई हो जो निगम से गए यात्रियों को मिली होगी ? लेकिन आनंद और यात्रा को अपनी तरह से करने की ख़ुशी शायद हमें ज्यादा मिली। आगे इस विषय में और भी बातें करेंगे तो संभव है कि आप भी एक मोटा- मोटी अंदाज़ा तो लगा ही पाएंगे !! 

अगर आपने आदि कैलाश यात्रा पर जाने का मानस बना लिया है तो एक दो महीने पहले से एक्सरसाइज करना -हल्की हल्की दौड़ लगाना शुरू कर दीजिये।  वहां उम्र की कोई बाधा नहीं है और मैंने 8 साल के बच्चों से लेकर 65 वर्ष के बुजुर्गों को ये यात्रा करते हुए देखा है।  आप अपना स्टैमिना पहचानिये और निकल चलिए यात्रा पर।  इटिनेररी की बात करते हैं : 

Itinerary : 

Day 0 :  Delhi - Kathgodam by Train/ Bus ( Overnight Journey ) -326 KM 

Day 1 : Kathgodam - Dharchula by Bus / Car / Shared Jeep -275 KM 

Day 2 : Inner Line Permit / SDM Office -Dharchula -Sight Seeing In Dharchula 

Day 3 : Dharchula - Lakhanpur / Nzong Top by Shared/ Hired Jeep - 50 KM -Nzong Top - Malpa -Lamari - Buddhi - 16 KM Trek 

Day 4 : Buddhi - Chhiyalekh -Garbyang-Gunji-15 Km Trek 

Day 5 : Gunji-Kalapani- Nabhidhang (Om Parvat ) Trek - 18 KM 

Day 6 : Nabhidhang - Kalapani-Gunji - Nabi Trek- 21 KM 

Day 7 : Nabi-Nampha-Kuti Trek -16  KM 

Day 8 : Kuti - Adi Kailash ( Jyolingkong ) -13 KM ,  Gauri Kund -Jyolingkong Trek - 3+3 KM 

Day 9 : Jyolingkong-Paravti kund -2+2 -Kuti -13 KM 

Day 10 : Kuti-Gunji Trek -19  KM 

Day 11 : Gunji- Buddhi Trek -15 KM

Day 12 : Buddhi - Nzong Top Trek -16 KM-Dharchula Jeep -50 KM 



Detailed Itinerary : 


Day 0 :  Delhi - Kathgodam by Train/ Bus ( Overnight Journey ) -326 KM  

पुरानी दिल्ली यानि दिल्ली जंक्शन से रानीखेत एक्सप्रेस रात में निकलती है जो सुबह पांच /छह बजे तक आपको काठगोदाम पहुंचा देती है। आप चाहें तो ISBT आनंद विहार से काठगोदाम की सीधी बस भी ले सकते हैं। दिल्ली से टनकपुर होते हुए धारचूला की एक बस भी जाती है शाम को चार बजे। आप चाहें तो इस बस से भी जा सकते हैं जो अगली सुबह आठ बजे के आसपास धारचूला पहुंचाती है। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये ...Adi Kailsh Yatra - First Day (Dharchula to Nzong Top)


Day 1 : Kathgodam - Dharchula by Bus / Car / Shared Jeep -275 KM   

काठगोदाम स्टेशन के बाहर ही आपको धारचूला की शेयर्ड जीप और कार मिल जाती हैं। किराया करीब 1000 रूपये लग जाता है। धारचूला में 400 रूपये से लेकर 2500 रूपये प्रति व्यक्ति प्रति रात के हिसाब से कई सारे होटल उपलब्ध हैं। दिल्ली -पिथौरागढ़ से ही cash का इंतेज़ाम करके चलिएगा। धारचूला में ATM तो हैं दो -तीन लेकिन उनपर निर्भर रहना समझदारी का काम नहीं होगा। धारचूला में पहुँचते -पहुँचते आपको शाम हो ही जानी है.



Day 2 : Inner Line Permit / SDM Office -Dharchula -Sight Seeing In Dharchula   

धारचूला पहुंचकर अगले दिन SDM ऑफिस में जाकर Inner Line Permit (ILP ) के लिए अप्लाई करिये। जब तक बाकी काम होगा , आप राजकीय चिकित्सालय में अपना मेडिकल करा के मेडिकल सर्टिफिकेट ले आइये। तीन से चार घंटे में आपको ILP मिल जाएगा। आपके पास आज की शाम खाली है तो काली नदी को पार करके नेपाल घूम आइये और आसपास की जो देखने लायक जगहें हैं उन तक भी होकर आ सकते हैं। शाम को ही अगली सुबह , लखनपुर या नजोंग टॉप तक जाने के लिए जीप hire कर लें अगर ग्रुप में हैं तो , नहीं तो अपनी सीट बुक कर लें और जीप वाले से निकलने का समय पूछ लें। ध्यान रखियेगा धारचूला में केवल BSNL और AirTel के ही नंबर काम करते हैं।


Day 3 : Dharchula - Lakhanpur / Nzong Top by Shared/ Hired Jeep - 50 KM - Nzong Top - Malpa -Lamari - Buddhi - 16 KM Trek   

पिछले वर्ष यानी 2018 में जब हम इस यात्रा पर गए थे तब केवल लखनपुर तक ही रोड बनी थी लेकिन अब ऐसी खबरें मिल रही हैं की 4 किलोमीटर और आगे नजोंग टॉप तक रोड बन गई है। इसका मतलब जीप अब नजोंग टॉप तक जा रही होंगी। सुबह -सुबह धारचूला से जीप से नजोंग टॉप तक पहुंचिए। वहां एक नेपाली फॅमिली का ढाबा है , चाय -वाय पीकर अपनी यात्रा शुरू करिये। नजोंग टॉप में एक चार स्तरीय ( Four Layered ) Fall है। चार किलोमीटर दूर मालपा है फिर वहां से पांच किलोमीटर आगे लमारी है और फिर सात किलोमीटर आगे बुद्धि गाँव है। इन सब जगहों पर रुकने -खाने की व्यवस्था है। जरुरत हो तो नजोंग टॉप से ही आपको खच्चर मिल जाते हैं। नजोंग टॉप करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर है जहाँ से संभवतः आपकी यात्रा शुरू होगी , मालपा 2100 मीटर की ऊंचाई पर जबकि लमारी 2410 मीटर और आज का आपका पड़ाव बुद्धि 2720 मीटर पर है।बुद्धि गाँव में आपको रहने खाने का इंतेज़ाम बहुत ही कम पैसों में हो जाता है अगर बिलकुल कम की बात करें तो 200 रूपये प्रति व्यक्ति तक भी । और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये......Adi Kailsh Yatra - Second Day ( Nzong Top to Buddhi)


Day 4 : Buddhi - Chhiyalekh -Garbyang-Gunji-15 KM  Trek   

बुद्धी गाँव से बाहर निकलते ही छियालेख की चढ़ाई शुरू हो जाती है। इस यात्रा की ये सबसे कठिन चढ़ाई मानी जाती है जिसमें तीन किलोमीटर की दूरी में आपको करीब 700 मीटर ऊपर चढ़ना होता है।  बुद्धी 2720 मीटर पर है और छियालेख 3400 मीटर पर।  रास्ते में यात्री शेड बने हैं और पत्थरों के रास्ते पर खच्चर भी लगातार चलते रहते हैं तो अपना मुंह कपड़े से बांधकर चलिए और खच्चरों से बचकर चलिए। छियालेख की चढ़ाई पूरी करते ही एक गेट जैसा आता है ईंटों का बना हुआ , इसके बाहर निकलते ही कुछ घर , दुकान दिखने लगेंगे। इनमें ही नाश्ता -खाना मिल जाता है। हमने अन्नपूर्णा रेस्टॉरेंट में अपनी पेट पूजा की थी जहां आपको चाय से लेकर कोल्डड्रिंक और फ्रूटी तक मिल जाती है। छियालेख बहुत ही सुन्दर और प्रकृति की मनोरम छटा वाली जगह है। आप अभी अभी ईंटों वाले जिस गेट से पार होकर आये हैं , वहां लिखा है -छियालेख : फूलों की घाटी ! छियालेख से अगला गाँव गर्ब्यांग ही है जो करीब छह किलोमीटर दूर होगा। जब आप छियालेख से निकलते हैं तो एक खूब चौड़ा रास्ता मिलता है जसके दाएं साइड एक बड़ी और खूब चौड़ी खुली हुई वैली दिखाई देने लगती है। गर्ब्यांग गाँव से करीब छह किलोमीटर आगे गुंजी 3269  मीटर ऊंचाई पर बसा एक भरा पूरा गाँव है जिससे पहले एक छोटा सा गाँव "नपलच्या " आता है और कुटी नदी का पुल पार करते ही आप गुंजी में होते हैं। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये..............Adi Kailsh Yatra - Third Day ( Budhi to Gunji )




Day 5 : Gunji-Kalapani- Nabhidhang (Om Parvat ) Trek - 18 KM 

गुंजी से कालापानी की दूरी 9 KM  है और इतना ही दूर कालापानी से नाभीढांग है। यानी आज कुल 18 किलोमीटर की यात्रा रहेगी । कालापानी से करीब एक किलोमीटर पहले काली नदी के किनारे एक जगह गर्म पानी का स्रोत है जिसमें नहाना तो बनता है।  कालापानी से आप पुल पार करके सीधे ही नाभीढांग जा सकते हैं लेकिन वहां एक खूबसूरत मंदिर है और इतनी दूर स्थित इस मंदिर के दर्शन करे बिना जाना असंभव था । मंदिर के सामने की पहाड़ी में एक बड़ा सा छेद सा दिखाई देता है जिसे व्यास गुफा कहते हैं और मान्यता ये है कि व्यास जी ने यहाँ बैठकर अपने कुछ ग्रंथों की रचना की थी। मंदिर की पूरी व्यवस्था ITBP के हाथों में है जिसे उन्होंने बहुत बेहतरीन रूप से संभाला हुआ है। आईटीबीपी के जवानों ने मस्त पुदीना चाय पिलाई। नाभीढांग वो जगह है जहाँ से आपको "ओम पर्वत " के दर्शन होते हैं। आदि कैलाश यात्री तो यहां से ओम पर्बत के दर्शन कर के वापस आ जाते हाँ जबकि कैलाश मानसरोवर यात्री नाभीढांग से नौ किलोमीटर आगे लिपुलेख दर्रा पार कर तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर के लिए पहुँचते हैं। गुंजी , जहाँ से आप चले हैं वो 3269 मीटर पर है , कालापानी 3626 मीटर पर और नाभीढांग 4550 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।  ओम पर्वत की ऊंचाई 6300 मीटर है।  नाभीढांग से ही कुछ पहले जीवन में पहली बार याक जैसे दिखने वाले जानवर "ज़िप्पू " को देखने का मौका मिला जिसे वहां के लोग "झब्बू " भी कहते हैं। ये गाय और याक की नस्ल का जानवर होता है जो सामान ढोने और खेतों में हल चलाने के लिए काम लिया जाता है । और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये........Adi Kailsh Yatra - Fourth Day ( Gunji to OM Parvat )

Day 6 : Nabhidhang - Kalapani-Gunji - Nabi Trek- 21 KM   

नाभीढांग में KMVN का गेस्ट हाउस भी है और फ़ोन की लैंडलाइन सुविधा भी उपलब्ध है हालाँकि कॉल रेट 6 रूपये प्रति मिनट है लेकिन सुविधा मिल रही है अपने घर बात करने की , ये ज्यादा मायने रखता है ! नाभीढांग से वापसी में उतराई थी और ज्यादा फोटो भी नहीं खींचने थे इसलिए कालापानी से नाभीढांग तक जाते हुए जहाँ हमें करीब छह घण्टे लगे थे उतरने में मुश्किल से तीन घण्टे लगे होंगे। नबी गाँव , आदि कैलाश के रूट पर गुंजी से करीब तीन किलोमीटर दूर है। नबी गाँव , छोटा गाँव है जहां के निवासी अपने नाम के साथ "नबियाल " लगाते हैं। नबी गाँव में रास्ते में ही खड़ी दो जिप्सी आपका ध्यान खींचती हैं , जहां रास्ते न हों वहां इनका क्या काम ? लेकिन कुछ जुनूनी लोग करीब 15 -16 साल पहले इन जिप्सियों को Disassemble करके ले गए थे और वहां जाकर Assemble कर लिया था। हालाँकि आज की तारीख़ में ये बस दिखाने भर के लिए हैं। नबी गाँव में बढ़िया गेस्ट हाउस ले लिया है। आपको इस क्षेत्र में कहीं पेड़ की टहनियां , कहीं सूखे पेड़ घर के बाहर लगे मिलेंगे जिन पर कपड़ों की झंडियां लगी होती हैं। ये लोग इसे बहुत पवित्र मानते हैं और ऐसा विश्वास करते हैं कि इस सब से बुरी आत्माएं घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पातीं। नाबी गाँव के दूसरी तरफ एक बहुत , मतलब सच में ही बहुत खूबसूरत गाँव हैं रेकोंग। दूसरी दिशा में "अपि पर्वत " श्रंखला शानदार नजर आ रही है और शायद नबी गाँव इस पर्वत को देखने का सबसे बढ़िया पॉइंट होगा !! और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये ......Adi Kailsh Yatra - Fifth Day ( Om Parvat to Nabi Village )


Day 7 : Nabi- Nampha - Kuti Trek -16  KM  

गुंजी से कुटी गाँव पूरे 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लेकिन हम नाबी गाँव से चले हैं आज तो तीन किलोमीटर कम चलना होगा। यहाँ से करीब सात किलोमीटर आगे नम्फा में KMVN के गेस्ट हाउस के सामने ही कुटी गाँव के सज्जन ने चाय -पानी का इंतेज़ाम किया हुआ है और एक -दो लोगों के लिए रुकने का भी ठिकाना मिल जाता है। नम्फा से आगे एक लोहे का पुल आता है और इस पुल को पार कर कुटी नदी एक बहुत चौड़ी घाटी से गुजरते हुए दिखाई देती है , और ये नजारा बड़ा विहंगम दृश्य पैदा करता है। पानी साथ में लेकर चलिएगा क्यूंकि नाबी गाँव के बाद आपको नम्फा और फिर कुटी में ही पानी मिल पायेगा , हाँ ! बीच में एक जगह एक वाटर टैप लगा है (जिसे आप फोटो में देख सकते हैं ) लेकिन उसका कोई भरोसा नहीं कभी पानी आ जाता है , कभी नहीं आता। अब तक का रास्ता ऐसा रहा है जहाँ न ज्यादा चढ़ाई और न ज्यादा उतराई है , यानी आपको लगेगा ही नहीं कि आप पहाड़ों में यात्रा कर रहे हैं ! कुटी  गाँव के प्रवेश द्वार में घुसते ही सामने आपको बहुत ही सुन्दर पहाड़ी गाँव का नजारा मिलता है जहां पांडव फोर्ट के अवशेष देखने को मिलते हैं।  बहुत ही सुन्दर गाँव है कुटी। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये ..........Adi Kailsh Yatra - Sixth Day ( Nabi to Kuti Village )



Kuti Village on the route Adi Kailash- https://www.youtube.com/watch?v=cR8P4pbvDQs&t=13s

Day 8 : Kuti - Adi Kailash ( Jyolingkong ) -13 KM ,  Gauri Kund -Jyolingkong Trek - 3+3 KM  

 कुटी....कुंती का अपभ्रंश है जो कभी कुंती हुआ करता होगा।  बिगड़ते बिगड़ते कुटी हो गया !! ये गांव इस दिशा में भारत का अंतिम गाँव है , इसके बाद कुछ नहीं करीब 25 किलोमीटर तक और फिर तिब्बत। कुटी की समुद्र तल से ऊंचाई करीब 3840 मीटर है।  कुटी गाँव के बिल्कुल पास ITBP की यूनिट भी है जहाँ आपको लैंडलाइन फ़ोन मिल जाएगा घर बात करने के लिए लेकिन शाम को बस 5 से 6 बजे तक का ही समय मिलता है सामान्य लोगों को बात करने के लिए। एक बड़ी विचित्र सी बात है -कुटी जैसे सीमावर्ती गाँव में किसी भी फ़ोन का , कोई नेटवर्क नहीं आता ( धारचूला से आगे नेटवर्क नहीं आता ) लेकिन फिर भी हर किसी के हाथ में स्मार्ट फ़ोन दीखता है। शायद फिल्म देखने के लिए , गाने सुनने के लिए रखते होंगे।यहाँ से आपको हर -हालत में दोपहर 12 बजे तक आगे के लिए निकल जाना होता है , अगर आप इसके बाद जाना चाहेंगे तो ITBP वाले आपको किसी भी कीमत पर नहीं जाने देने वाले। ज्योलिंगकांग यानि आदि कैलाश में आपको यात्रा सीजन में रुकने और खाने की कई हट मिल जाती हैं।  यहाँ से करीब तीन किलोमीटर आगे गौरीकुंड है जो आदि कैलाश पर्वत का बेस है। यहाँ बहुत ज्यादा ठण्ड होती है इसलिए गर्म कपडे पहनकर जाइये और पानी की बोतल जरूर साथ रखियेगा। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये.......Adi Kailsh Yatra - Seventh Day ( Kuti Village to Adi Kailash )




Day 9 : Jyolingkong-Paravti kund -2+2 -Kuti -13 KM  

गौरीकुण्ड के  अलावा एक और कुण्ड है जिसे पार्वती कुण्ड या पार्वती सरोवर कहते हैं। ये भी उतना ही दूर है जितना गौरी कुण्ड है यानि 2 -3 किलोमीटर की दूरी पर लेकिन विपरीत दिशा में। इसमें पड़ने वाली आदि कैलाश पर्वत की छाया (Shadow ) मंत्रमुग्ध कर देती है। इसके दर्शन करने के बाद आप वापस कुटी की तरफ लौटते हैं , उसी रास्ते से जिस रास्ते से आप कुटी से ज्योलिंगकांग ( आदि कैलाश ) आये थे।  यात्रा संपन्न हो चुकी है और अब वापस लौटने का समय है। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये....Adi Kailsh Yatra - Adi Kailash



Day 10 : Kuti-Gunji Trek -19  KM  

कुटी गाँव से सुबह जल्दी निकलिए की कोशिश करियेगा जिससे आपको कुटी गाँव से चार पांच किलोमीटर दूर जाकर कोई आर्मी की ट्रक मिल जाए। अगर उसमें आपको लिफ्ट मिल गई तो आप गुंजी दो -तीन घंटे में ही पहुँच जाएंगे और हो सकता है , आपका एक दिन भी बच जाए। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये.....Adi Kailsh Yatra - Ninth Day ( Kuti Village to Budhi)

 Day 11 : Gunji- Buddhi Trek -15 KM

गुंजी से बुद्धि के रास्ते में अब आपको कोई चढ़ाई नहीं है , आसान रास्ता है।  हो सकता है गुंजी से छियालेख तक किसी ट्रक में आपको लिफ्ट मिल जाए।  आज आप आसानी से बुद्धि गाँव तक पहुँच जाएंगे। और विस्तृत रूप से पढ़ना चाहें तो इस लिंक पर क्लिक करिये....Adi Kailsh Yatra - Tenth Day ( Budhi to Dharchula Return)


Day 12 : Buddhi - Nzong Top Trek -16 KM- Dharchula Jeep -50 KM 

ये आज आपका इस यात्रा का अंतिम दिन है। चार -पांच बजे तक हर हालत में नजोंग टॉप / लखनपुर तक पहुँचने की कोशिश करियेगा जिससे आपको धारचूला तक जाने वाली शेयर्ड जीप मिल जायेगी। 


नोट : मैंने इस पोस्ट में जहाँ -जहाँ रुकने और खाने की व्यवस्था लिखी है वहां KMVN का गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है जिसका रेट आप KMVN की साइट से पता कर सकते हैं जो शायद Rs 700 / Night / Person है। लेकिन हम ज्यादातर लोकल लोगों के यहाँ रुके थे जिनके यहाँ खाना और रहना लगभग 200 रूपये से लेकर 350 रूपये प्रति व्यक्ति में हो जाता है। गर्म कपडे और पानी के साथ -साथ ड्राई फ्रूट्स , नमकीन -बिस्कुट जरूर अपने पास रखिये। इसके अलावा कुछ बहुत जरुरी दवाइयां -गर्म पट्टी , मलहम , iodex , विक्स और चूसने वाली टॉफ़ी जैसे पल्स आदि भी लेकर चलिए। अगर आप पान मसाला -तम्बाकू -सिगरेट के शौक़ीन हैं तो अपना सब व्यवस्था पहले ही लेकर जाइये। मुश्किल है ये सब मिलना , या मिलता भी होगा तो मैंने खरीदा नहीं। शराब -देशी चकती का ज्यादा सेवन मत करिये क्यूंकि एक तो ये धार्मिक यात्रा है और दूसरी बात आपको सांस लेने में भी परेशानी होगी। 

Adi Kailash Yatra Full Guide Video 

कुछ संदेह हो , कोई सवाल हो तो लिखें। मेरा इस यात्रा का रूट मैप का एक वीडियो भी मेरे Youtube चैनल पर उपलब्ध है जिसका लिंक मैं यहाँ दे रहा हूँ , देखिएगा ! आपके बहुत काम आएगा !! जय भोले !!