गुरुवार, 4 जून 2015

भूटान मोनेस्ट्री और बांग्ला देश मोनेस्ट्री

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जिस दिन हम गया पहुंचे थे उसी दिन शाम को बोधगया भी निकल गए घूमने के लिए। पहले ग्रेट होलीलैंड मोनेस्ट्री देखी फिर सीधा बुद्ध की 80 फ़ीट ऊँची मूर्ति देखने गए। इतने में अँधेरा होने लगा था और ज्यादातर जगहें बंद हो रही थीं। लोगों से पता किया तो उन्होंने बताया कि अब बस आपको महाबोधि मंदिर ही देखने को मिल सकता है , वो 9 बजे तक खुला रहता है। लेकिन लोगों की जानकारी आधी अधूरी थी। बुद्ध की मूर्ति के पास ही भूटान की मोनेस्ट्री खुली हुई थी। वहीँ घुस गए। एक लड़का सा बैठा था बाहर , उसे न तो बहुत ज्यादा मंदिर के विषय में पता था और न ही भूटान के बारे में। उसका काम सिर्फ मोनेस्ट्री का ताला खोलना , बंद करना और साफ़ सफाई का ही रहा होगा।


भूटानी मोनेस्ट्री में भगवान बुद्ध की 7 फुट ऊँची प्रतिमा लगी हुई है। इसके अंदर भगवान बुद्ध को अनेक रूपों में मिटटी से कलाकृतियां बनाकर दिखाया गया है। भगवान की प्रतिमा के दायें एक कोई स्त्री की भी प्रतिमा है , वो कौन हैं मुझे नही मालुम। शायद भगवान बुद्ध की पत्नी रही होंगी। इस मोनेस्ट्री में यात्रियों के लिए रुकने की जगह भी है लेकिन कौन रुकता है ? वहां हमें तो कोई दिखाई नही दिया , घूमने आने वाले लोगों के अलावा ! शायद जब कभी बौद्ध भिक्षु आते होंगे तो वो रुकते होंगे। इस मोनेस्ट्री में भूटान के वर्तमान और भूतपूर्व राजा दोनों के फोटो भी लगे हैं।


भूटान की मोनेस्ट्री देखने के बाद अब हम सोच रहे थे चलो महाबोधि मंदिर के दर्शन करते हैं। पैदल पैदल जब रास्ते पर चलते जा रहे तब एक और मंदिर खुला दिख गया। ये बांग्ला देश की मोनेस्ट्री थी। देखते चलते हैं। अंदर पहुंचे तो वहां के सुरक्षा गार्ड "मिंटू " ने हमें रोक लिया , बोला अभी पूजा चल रही है। हम वहीं खड़े रहे 3 -4 मिनट तक। पता नही फिर क्या हुआ उसने स्वयं ही हमें अंदर जाने के लिए कह दिया। बस हिदायत दे दी कि शोर मत करना और फोटो मत खींचना। भाई शोर तो हम नही करेंगे यहां लेकिन फोटो तो जरूर खींचेंगे, हम यहां कोई पूजा पाठ करने थोड़े ही आये हैं , हम फोटो खींचने ही तो आये हैं। ऐसा हमने मन में कहा और जैसे ही वो इधर उधर हुआ हमने धड़ाधड़ फोटो किलक करने शुरू कर दिए। बौद्ध भिक्षुओं ने मुड़कर भी नही देखा कि पीछे क्या हो रहा है !!

इस मोनेस्ट्री में केंद्र में भगवान बुद्ध की छोटी सी सफ़ेद रंग की प्रतिमा लगी है , उसके दायें बाएं भी एक एक प्रतिमा है और सामने भी नीचे की तरफ दो प्रतिमा है ! कुल मिलाकर पाँच प्रतिमाएं हैं ! साथ में किसी की फोटो भी लगी हुई है। मोनेस्ट्री की दीवारों पर कोई लामा हैं (दलाई लामा नही ) जिनकी बहुत सारी तसवीरें लगी हुई हैं जिनमें वो दलाई लामा के साथ , इंदिरा गांधी के साथ , बांग्ला देश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना के साथ और हमारे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ दिखाई दे रहे हैं। कोई पहुंचे हुए लामा होंगे। 


इन दोनों मोनेस्ट्री को मैंने दो बार देखा , पहले दिन,  रात के समय और अगले दिन दोपहर को। अलग अलग फोटो मिलेंगे आपको ! इसके बाद अब विश्व प्रसिद्द महाबोधि मंदिर चलेंगे !














ये मिटटी ( क्ले ) से बनायी गयी कलाकृतियां दीवारों पर बहुत सुन्दर दिखती हैं

ये मिटटी ( क्ले ) से बनायी गयी कलाकृतियां दीवारों पर बहुत सुन्दर दिखती हैं

ये देवी कौन हैं ? यशोधरा ?
दीवार पर उकेरी गयी एक और कलाकृति

दीवार पर उकेरी गयी एक और कलाकृति
भगवान बुद्ध विश्राम कर रहे हैं



भगवान बुद्ध विश्राम कर रहे हैं


ये भूटान की संस्कृति और कला के अभिन्न अंग हैं
ये भूटान की संस्कृति और कला के अभिन्न अंग हैं
ये भूटान की संस्कृति और कला के अभिन्न अंग हैं



 ये बांग्ला देश की बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री हैं ! बीच में सफ़ेद मार्बल से तैयार भगवान बुद्ध की प्रतिमा
रात के अँधेरे का फोटो है
भगवान बुद्ध की पाँच अलग अलग प्रतिमाएं हैं यहां !
भगवान बुद्ध की पाँच अलग अलग प्रतिमाएं हैं यहां !





एक फोटो अपना भी तो खिचवा लूँ

बांग्ला देश की मोनेस्ट्री के गेट के पास कमल पर विराजमान भगवान बुद्ध

ये रात होने के बाद

ये रात होने के बाद
बोध गया में प्रवेश करते ही ये साइन बोर्ड रास्ता बता देता है !!

                                                                                                            यात्रा ज़ारी रहेगी :
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