सोमवार, 4 मई 2015

जयमल फत्ता महल और विजय स्तम्भ : चित्तौड़गढ़

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पद्मिनी महल के बिल्कुल सामने ही राजस्थान पुलिस का अपने रडार ट्रेनिंग सेंटर है और उसी दिशा में कुछ खण्डहर भी हैं जो कभी महल रहे होंगे। इस किले में 65 ऐतिहासिक इमारती हुआ करती थीं जिनमें 4 महल , 19 मुख्य मंदिर , 4 मेमोरियल और 20 तालाब हुआ करते थे लेकिन सब समय के साथ मिट्टी में मिल गया। जैसे इंसान मिट्टी में मिल जाता है। थोड़ा सा आगे बढ़ने पर नौगज़ा पीर आता है , मैं नही गया क्योंकि मुझे पार आदि में कोई मजा नही आता। आगे चलने पर एक जगह बोर्ड लगा है जिस पर लिखा है जयमल फत्ता हवेली उद्यान। अंदर पहुँच गया। उद्यान तो किसी मतलब का नही है बल्कि उद्यान के नाम के अलावा वहां कुछ है भी नही जिसे उद्यान कहा जा सके। लेकिन जयमल -फत्ता के विषय में जानना बहुत ही रोचक और रोमांचित करने वाला प्रसंग है।

जयमल -फत्ता एक नहीं दो लोग हैं। एक हैं बदनोर के जयमल राठौर जो मीराबाई के चचेरे भाई थे। और एक फ़तेह सिंह सिसोदिया उर्फ़ फत्ता। इनकी वीरता की कहानियाँ आपको चित्तौड़गढ़ की मिटटी में रची बसी मिलती हैं। जब महाराणा उदय सिंह ने चित्तौड़गढ़ को छोड़कर उदयपुर को अपनी राजधानी बनाया तो जयमल को चित्तोड़ का किलेदार बना दिया और पूरा किला और उसकी सुरक्षा का जिम्मा उनके हवाले करके उदय सिंह उदयपुर चले गए। सन 1568 ईस्वी में जब अकबर ने दुर्ग पर हमला कर दिया तो उसकी सेना किले की मजबूत दीवार को पार नही कर पा रही थी और इसी चक्कर में चार महीने बीत गए। आखिर अकबर ने विस्फोट करके एक दीवार तुड़वा दी जिससे उसकी सेनाएं अंदर घुस सकें। जयमल ने जब टूटी हुई दीवार देखि तो उन्होंने उसको तुरंत ठीक करवाने के लिए वहां मिस्त्री लगा दिये। जब अकबर ने शाही कपडे पहने एक शख्स को देखा तो उसे लगा ये जरूर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति होगा और उसने अपनी बन्दूक "संग्राम " से उस व्यक्ति को घायल कर दिया। ये व्यक्ति जयमल था।

जब दुर्ग के अंदर राजपूतों को ये आभास हो गया कि वो अब ये युद्ध नहीं जीत सकते तो दुर्ग के अंदर "जौहर " की अग्नि प्रज्वलित होने लगी। इस अग्नि को देखकर आमेर के राजा भगवानदास को एहसास हो गया कि अब राजपूत राजा अपनी आखिरी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं और उसने मुग़ल सेना को इस बारे में सतर्क कर दिया। भयंकर युद्ध हुआ जिसमें जयमल मारे गए और उनके मरने के बाद फत्ता ने युद्ध की कमान संभाली। लेकिन वो भी युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध में एक अनुमान के अनुसार 3 ०,००० योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे। अकबर ने इन दोनों नवयुवक वीरों की वीरता का सम्मान करते हुए अपने आगरा के महल के बाहर दोनों की हाथी पर सवार मूर्ति लगवाई लेकिन उसे औरंगजेब ने तोड़ डाला।


विजय स्तम्भ

विजय स्तम्भ अब हेरिटेज साइट में शामिल है। विजय स्तम्भ या जय स्तम्भ को राणा कुम्भा ने 1458 से 1468 के बीच , मालवा के सुल्तान महमूद शाह के विरुद्ध 1440 ईस्वी में मिली जीत की निशानी के तौर पर बनवाया था। आठ मंजिल के बाद इसमें नौंवीं मंजिल पर एक तरह की छतरी ( डोम ) है जिसे बाद में बनवाया गया था। ये एक बार बिजली गिरने से कुछ टूट भी गया था जिसे पुनः मरम्मत करके वर्तमान रूप में लाया गया। इसमें कुल 157 सीढ़ियां हैं जो आपको ऊपर तक ले जाते हुए आपकी हालत खराब करने के लिए काफी हैं। हजारों लोग इन पर रोज़ चढ़ते उतरते हैं जिससे ये बहुत चिकनी हो गयी हैं। साइज में भी बहुत छोटी हैं और इनके ऊपर खड़े होने की भी ज्यादा जगह नहीं है इसलिए नए आदमी का एक दो बार तो कम से कम सिर फुट ही जाता है। एक और भी बात ध्यान देने की है , जैसा मैंने बताया की जगह बहुत कम है तो एक बार में इन सीढ़ियों से एक ही आदमी आ या जा सकता है अगर कैसे भी दोनों तरफ से लोग मिल गए तो एक को रुकना पड़ेगा जैसे तंग गली में एक गाडी को रोककर दूसरी निकालनी पड़ती है ऐसे ही एक को रोक कर दुसरे को निकाला जाता है , पहले आप ! हाँ , गोल गोल चक्कर से में जरूर जगह है जहां से आप पूरा चित्तोड़ देख सकते हैं और ठंडी ठंडी हवा का आनंद ले सकते हैं। सबसे ऊपर जाकर डोम के नीचे बहुत ही ठंडी हवा लगती है और एक मस्त और रोमांचित करने वाला नजारा दिखाई देता है !


आज बस इतना ही , बहुत हो गया ! आइये फोटो देखते चलें :



ये बाहर से जयमल फत्ता की हवेली

हनुमान जी के सेना के कमांडो

जयमल -फत्ता महल ! कभी महल रहा होगा अब खण्डहर है

जयमल -फत्ता महल ! कभी महल रहा होगा अब खण्डहर है



जयमल -फत्ता महल ! कभी महल रहा होगा अब खण्डहर है

जयमल -फत्ता महल ! कभी महल रहा होगा अब खण्डहर है


जयमल -फत्ता महल ! कभी महल रहा होगा अब खण्डहर है



विश्व हेरिटेज में शामिल विजय स्तम्भ
विश्व हेरिटेज में शामिल विजय स्तम्भ
विश्व हेरिटेज में शामिल विजय स्तम्भ


विजय स्तम्भ की सीढ़ियां बहुत रपटीली सी हैं
विजय स्तम्भ में अंदर की कलाकृतियां

ये विजय स्तम्भ की छत है

विजय स्तम्भ में अंदर की कलाकृतियां

विजय स्तम्भ में अंदर की कलाकृतियां

विजय स्तम्भ में अंदर की कलाकृतियां

बड़ी ठंडी हवा आती है इन झरोखों से







विजय स्तम्भ के सामने ही है ये ! क्या है नहीं मालूम


और ये इसी की दूसरी साइड ! कितना अंतर है न ?



अलग अलग कोण से विजय स्तम्भ

अलग अलग कोण से विजय स्तम्भ

अलग अलग कोण से विजय स्तम्भ

विजय स्तम्भ क्षेत्र में ही है ये सब


अलग अलग कोण से विजय स्तम्भ

अलग अलग कोण से विजय स्तम्भ

   

                                                                                                      आगे जारी है:
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