गुरुवार, 1 जून 2017

Kuldhara : A Haunted Village

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सम के सैंड ड्यून्स से वापस लौटकर हमारा अगला पॉइंट कुलधरा गाँव था ! कुलधरा गाँव से आप लोगों में से अधिकांश परिचित होंगे , जो नहीं हैं वो अब हो जायेंगे ! कुलधरा चलेंगे , थोड़ा ठहर जाओ यार ! हल्की सी भूख लग रही है , सम सैंड ड्यून्स के आसपास कुछ ढाबा टाइप दुकान हैं जहां आपको कोल्ड ड्रिंक -चाय -मैग्गी मिल जायेगी ! पानी की बोतल तो मिलेगी ही ! परेशान न हों ! तो पेट पूजा करके अब चलते हैं कुलधरा ! थोड़ी देर के इंतज़ार के बाद एक जीप आ गई और उसी में बैठ गए ! कुलधरा का बोर्ड लगा है सड़क के किनारे तो जीप वाले ने हमें वहीँ उतार दिया और खुद चला गया जैसलमेर ! लेकिन कुलधरा यहां से लगभग 3 किलोमीटर और आगे है , क्या करें ? पैदल ही चलते हैं ! चलने लगे ! एक आदमी और था हमारे साथ , वो उधर ही एक पत्थर काटने की फैक्ट्री में काम करता था ! ज्यादा नहीं चल पाए होंगे , ज्यादा से ज्यादा 500 मीटर ही और पीछे से एक दूध गाड़ी सी आ गई और उसी में "फिट " हो गए ! आई तो और भी थीं लेकिन किसी ने रोकी नहीं ! लो जी पहुँच गए कुलधरा ! कुलधरा जो कम से कम तीन साल से दिमाग में कीड़े की तरह कुलबुला रहा था , आज उसके द्धार पर खड़ा हूँ , उसे देखने , महसूस करने ! हालाँकि मैं ये जानता हूँ कि इस एक दो घंटे में मैं इसे क्या महसूस कर पाऊंगा ? क्या जान पाऊंगा इसके बारे में ? लेकिन अपने मन की अनबुझी प्यास को कुछ हद तक मिटा तो सकता हूँ ! है न ? कुलधरा क्यों आया हूँ मैं , ये भी जानना समझना जरुरी है ! तो आइये इस गांव में घुसने से पहले इसकी कहानी , इसके इतना विख्यात होने के कारणों के साथ साथ इसके इतिहास से भी परिचित हो लिया जाय :



जैसलमेर शहर से दक्षिण -पश्चिम दिशा में करीब 18 किलोमीटर दूर कुलधरा गाँव एक भुतहा (Haunted ) गाँव माना जाता है ! भुतहा कैसे हो गया ये गांव ! इस पर अलग अलग लोगों की अलग अलग कहानियां हैं ! कोई कहता है कि पानी की बेतहाशा कमी की वजह से ये गांव धीरे धीरे खाली होता चला गया और फिर जब ये पूरा गांव खाली हो गया तो यहाँ भूतों ने अपना डेरा जमा लिया ! उधर दूसरी कहानी भी सुनने को मिलती है जो ज्यादा सटीक बैठती है ! उस कहानी को हालाँकि सालिम सिंह के लोग , उनके वंशज ख़ारिज करते हैं ! लेकिन वो कहानी है क्या ? ये जानना भी तो जरुरी है !


कुलधरा पालीवाल ब्राह्मणों का एक गोत्र हुआ करता था ! पालीवाल मतलब पाली वाले ब्राह्मण ! पाली एक समृद्ध शहर रहा है राजस्थान में , तो वहां के ब्राह्मणों ने दूसरा स्थान चुना रहने के लिए ! और जिस स्थान को उन्होंने चुना वो जगह कुलधरा कहलाई ! लक्ष्मी चंद की 1899 में लिखी किताब " तारीख ए जैसलमेर " ने लिखा है कि "काधन " नाम के ब्राह्मण ने सबसे पहले यहाँ अपना घर बनाया था ! पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध , शिक्षित और व्यापारी थे ! ये बात है 1291 ईस्वी की ! उन्होंने करीब 600 घर बनाये यहां ! कुलधरा गाँव पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तौर पर बना था। ईट पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था। कहते हैं कि इस कोण में घर बनाए गये थे कि हवाएं सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थीं । और ये सब कपोल कल्पित नहीं बल्कि आप अनुभव कर सकते हैं , देख सकते हैं ! कुलधरा के ये घर रेगिस्ताकन में भी वातानुकूलन का अहसास देते थे । इस जगह गर्मियों में तापमान 45 डिग्री रहता हैं पर आप यदि अब भी भरी गर्मी में इन वीरान पडे मकानो में जायेंगे तो आपको शीतलता का अनुभव होगा। गांव के तमाम घर झरोखों के ज़रिए आपस में जुड़े थे इसलिए एक सिरे वाले घर से दूसरे सिरे तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सकती थी । घरों के भीतर पानी के कुंड, ताक और सीढि़यां कमाल के हैं । अपने ज्ञान , कौशल और तकनीकी योग्यता के बल पर पालीवाल ब्राह्मणों ने इस जिप्सम की परत वाली जगह को भी "सोना देने " वाली जमीन बना दिया ! लेकिन .... इन सब वजहों से ये गाँव महारावल और उनके प्रधानमंत्री सालिम सिंह की नजर में आ गया ! सालिम सिंह की गन्दी नज़र गाँव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। गांववालों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी। उन्होंने बेटी बचाने का निर्णय लिया ! और इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे।

फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातोंरात सभी 84 गांव आंखों से ओझल हो गए। जाते-जाते उन्होंने श्राप दिया कि आज के बाद इन घरों में कोई नहीं बस पाएगा। अब ये कितना सही है या गलत है भगवान् जाने लेकिन आज भी वहां की हालत वैसी ही है जैसी उस रात थी जब लोग इसे छोड़ कर गए थे। ये सब देखने , इसकी सत्यता जांचने के लिए "इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी " के गौरव तिवारी 2010 में अपनी 18 लोगों के टीम लेकर वहां गए और उन्होंने वहां रात में रुककर ये दावा किया कि उन्होंने भुतहा आवाजें , और अन्य क्रियाकलाप महसूस किये थे !


राजस्थान सरकार ने यहाँ एक कैक्टस पार्क बनाने की योजना शुरू की थी 2006 में लेकिन फोटो देखेंगे तो आपको लगेगा कि ये योजना भी और योजनाओं की तरह मृत प्राय हो चुकी है ! अच्छा हाँ , एक बात और, यहाँ सैफ अली की फिल्म "एजेंट विनोद " की शूटिंग भी हो चुकी है जिसके कुछ दृश्यों के लिए यहाँ सेट तैयार किये गए थे ! कुछ घरों को तालिबान के घरों के रूप में तैयार किया गया था !


तो अब यहाँ विराम देते हैं ! आप फोटो देखते जाइये और हाँ , अब लोद्रवा चलेंगे !!



ये स्वागत द्धार अभी बन रहा है और अगर आपको कुलधरा जाना है तो इसके बराबर से रास्ता है

कैक्टस पार्क बनाने की योजना शुरू हुई थी 2006 में ! इसका हाल देख लीजिये



ये कुछ ठीक हैं
कैक्टस पार्क बनाने की योजना शुरू हुई थी 2006 में ! इसका हाल देख लीजिये



जाने नहीं देंगे तुझे..........
सभी घर एक दुसरे से जुड़े हुए हैं


तीन तिलंगे
ये सीढ़ियां एक इशारा करती हैं कि शायद यहाँ के घर दो मंजिल भी रहे होंगे











"एजेंट विनोद " फिल्म की शूटिंग के लिए कुछ घर तालिबान रूप में तैयार किये गए थे

"एजेंट विनोद " फिल्म की शूटिंग के लिए कुछ घर तालिबान रूप में तैयार किये गए थे




















अच्छा ! तो अब हम चलते हैं ......फिर मिलते हैं :
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