मंगलवार, 14 मार्च 2017

Places to visit in Morena

मध्य प्रदेश में घूमने लायक बहुत कुछ है और बहुत जगह हैं लेकिन मुरैना की तरफ शायद ही कोई देखना पसंद करता हो ! आदमी ग्वालियर तक जाकर वापस आ जाता है और मुरैना की तरफ मुंह उठाकर भी नहीं देखता ! इसका मतलब ये नही कि मुरैना में कुछ है ही नहीं ? बहुत कुछ है मित्रो , लेकिन लाइमलाइट में नहीं है इसलिए कोई जाता नहीं ! तो ये जो पोस्ट है ये पूर्ण रूप से मुरैना पर ही केंद्रित रहेगी ! क्या क्या है देखने को ? कैसे जाएँ ? कहाँ रुक सकते हैं ? ये सब बातें होंगी आज , आज इस पोस्ट में !

How to Reach (कैसे जाएँ ) : 
मुरैना मध्य रेलवे ( Central Railway ) लाइन पर दिल्ली , मुम्बई , झांसी से बढ़िया तरह से जुड़ा हुआ है ! दिल्ली से रात 10 -11 बजे की कोई ट्रेन लीजिये और सुबह सुबह 5 बजे तक आप मुरैना में होंगे ! मैं दक्षिण एक्सप्रेस से गया था जो हज़रत निजामुद्दीन से रात को 11 बजे निकलती है और सुबह साढ़े चार बजे पहुंच जाती है ! नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर में है जो मुरैना से लगभग 40 किलोमीटर दूर है !

Where to Visit (कहाँ कहाँ घूमें) :

आप जब मुरैना पहुँचते हैं तो स्टेशन से बाहर आकर ऑटो/ टेम्पो पकड़िये और नूराबाद पहुँच कर नूरमहल अर्थात गुना बेगम का महल देखिये और आगे की सोचिये !

Noorabad :

हालाँकि ये जगह बहुत सुन्दर नहीं है लेकिन जब आप यहां आये हैं तो देखने में आई बुराई भी नहीं है ! ये मुरैना के नूराबाद टाउन में है , नूराबाद को जहांगीर के समय में बसाया गया था और ये महल , गयासुद्दीन की बेगम गुना बेगम को समर्पित है ! और पढ़ें .... . ... .... 

morena.nic.in से साभार

Bateshwar Temples : 

नूराबाद से बटेश्वर मंदिर समूह करीब 10 -12 किलोमीटर दूर है तो बेहतर होगा आप , मुरैना से या नूराबाद से ही गाडी किराये पर ले लें ! पूरी जानकारी आपको इन पोस्ट में मिल जायेगी ! भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर समूह फिर से बनाया गया है और इन मंदिरों को फिर से बनाने का पुण्य कार्य डॉ के के मुहम्मद ने दस्यु सम्राट निर्भय सिंह के साथ मिलकर किया है ! और पढ़ें .... . ... ....


Gadhi Padhawali Fort :


आइये बटेश्वर मंदिर से आगे गढ़ी पड़ावली फोर्ट चलते हैं । रास्ते के दोनों तरफ खुदाई में निकली टूटी हुई मूर्तियों को तरीके से लगाकर सुंदर और आकर्षक रूप दिया है । सामने ही दो तगड़े शेर ( शायद एक शेर -एक शेरनी हैं ) इस फोर्ट की सुरक्षा में तैनात दिखाई पड़ते हैं ! इस फोर्ट में ज्यादातर पुराने - खुदाई में निकले पत्थरों का उपयोग किया गया है ! इस फोर्ट को मंदिर के रूप में ASI के अनुसार 10 वीं शताब्दी में बनाया गया था और 18 वीं शताब्दी में धौलपुर के राणा ने इस मंदिर के पास में ही एक छोटा किला भी बना लिया ! छोटे किले को "गढ़ी " कहा जाता है और इसीलिए इस फोर्ट का नाम "गढ़ी पड़ावली " कहा जाता है ! आगे पढ़िए .... . ... ....


Chaunsath Yogini Mandir :


मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर भारत के उन गिने चुने योगिनी मंदिरों में से एक है जो आज भी ठीक हालात में हैं ! इस मंदिर को " एकत्त्तरसो महादेव मंदिर" भी कहा जाता है ! इस मंदिर के अलावा दो योगिनी मंदिर ओडिशा में हैं और एक मंदिर मध्य प्रदेश के ही जबलपुर में है ! भारत के संसद भवन जैसा दिखने वाला ये मंदिर लगभग 30 मीटर की ऊंचाई पर है और 100 सीढियां चढ़कर आपको मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचना होता है ! पूरी तरह से गोलाकार आकृति में बने इस मंदिर में 64 कक्ष हैं और बीच में एक मंडप है जो मुख्य मंदिर माना जाता है ! इन 64 कक्ष में पहले भगवान् शिव और योगिनी की मूर्तियां लगी हुई थी लेकिन कुछ मूर्तियों के चोरी हो जाने के कारण सभी मूर्तियों को वहां से हटा कर भारत के विभिन्न संग्रहालयों में भेज दिया गया और अब ये कक्ष ( Chamber ) खाली नजर आते हैं ! इस मंदिर का मुख्य द्वार बहुत छोटा सा है और जिस तरह पहले गाँव में दरवाज़े होते थे कुछ इसी तरह का बना हुआ है ! ऐसा माना जाता है कि 1920 में बने हमारे संसद भवन को भी इसी के आधार पर डिजाईन किया गया है ! और पढ़िए .... . ... ....



Kakanmath Temple :

सुहानियां , जिसे पहले सिंफनिया कहते थे , से करीब दो किलोमीटर दूर बावड़ीपुरा गांव के खेतों के बीच बने इस मंदिर को कच्छपघाट ( कछवाहा ) राजा "कीर्तिराज " ने 11 वीं शताब्दी में बनवाया था ! उस समय में सुहानियां इन राजाओं की राजधानी हुआ करता था ! मूलरूप से भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को खजुराहो मंदिरों की बनावट के आधार पर अपनी रानी "ककनवती " के अनुरोध पर बनाया था ! इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस मंदिर को बनाने के लिए किसी भी प्रकार का सीमेंट या गारा प्रयोग नही किया गया है ! किसी भी तरह के एडहेसिव (Adhesive ) के बिना बनाया गया शायद ये दुनिया का पहला और एकमात्र मंदिर होगा ! आगे पढ़िए .... . ... ....










ये बता सकते हैं क्या है ?




हर एक मूर्ति खंडित है !! Each & Every Statue is damaged 

What an Engineering ! Sir Ji

What an Engineering ! Sir Ji


हर एक मूर्ति खंडित है !! Each & Every Statue is damaged



ओह !








हर एक मूर्ति खंडित है











Kutwar Village : 

आप सोच रहे होंगे , इस गांव में ऐसा क्या है ! ये असल में महाभारत के समय का गांव है जो हस्तिनापुर के जैसा ही महत्त्व रखता है ! कहते हैं यहीं कुंती को भगवान सूर्य ने वरदान दिया था जिससे उन्हें कर्ण पैदा हुए ! भगवान सूर्य के रथ के निशान आज भी मौजूद बताये जाते हैं ! ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव अपना रथ लेकर यहीं कुँवारी नदी के किनारे अपना रथ लेकर आये थे और उनके रथ के घोड़ों के निशान अभी भी मिलते हैं ! नदी का नाम भी शायद "कुँवारी " कुंती के नाम पर ही रखा गया होगा ! कुटवार गाँव को "कुंतलपुर " भी कहते हैं ! आगे पढ़ें..............

दैनिक भास्कर से साभार

Where to stay (कहाँ रुकें) : 

मुरैना हालाँकि छोटा शहर है और एक भी फाइव स्टार होटल नहीं है लेकिन हम जैसे लोगों के रुकने के लिए बहुत सारी धर्मशालाएं , छोटे छोटे गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं ! 





मुरैना यात्रा समाप्त हो रही है !! ******सबको राम राम****************************** 
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