मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

Bateshwar Temples : Morena ( Second part )

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हमें पीछे की तरफ से प्रवेश करने का फायदा निश्चित रूप से मिला और हम मंदिर समूह के पीछे की शानदार पहाड़ियों को भी जी भर के देख पाए ! ये जगह ही ऐसी है कि आप जी भर के हर एक मंदिर , हर एक जगह को देख लेना चाहते हैं , महसूस कर लेना चाहते हैं ! दूर से देखने पर जो मूर्तियां अपनी स्थापत्य में बहुत सुन्दर लगती हैं , पास पहुँचने पर उन्हीं मूर्तियों में कुछ न कुछ नुक्स दीखता है ! कोई न कोई अंग -भंग हुआ मिलता है लेकिन हजारों मूर्तियों में से इन कम भंगित मूर्तियों को चुनना भी एक कठिन काम रहा होगा !


मैं ये बात आप लोगों को फिर से बता देना चाहता हूँ कि अगर आप इस जगह जा रहे हैं तो अपने खाने पीने का इंतज़ाम करके ले जाएँ अन्यथा आपको मुश्किल होगी ! इस वक्त सुबह के लगभग 10 बजे हैं और हमारे पेट में आज चाय के अलावा कुछ नहीं गया है ! आगे जाकर पडावली गाँव में क्रीम रोल और मैग्गी मिल पाई और एक किलो टमाटर कटवा लिए ! ये हमारा आज का नाश्ता था ! हाँ , बिस्कुट के कुछ पैकेट जरूर मिल गए ! काम बन गया !


इस मंदिर समूह में बजरंग बली हनुमान जी की जो मूर्ति है वो सामान्यतः और जगह देखने को नही मिलती ! इस मूर्ति में हनुमान जी ने पैरों के नीचे रति और कामदेव को दबोच रखा है ! लेकिन इतने मंदिरों के होने बावजूद भी हनुमान जी की इस मूर्ति को कहीं स्थापित नही किया जा सका है ! अभी भी खुले आसमान के नीचे रखी हुई है ! हालाँकि यही एक जगह है जहां खुले में पूजा कर सकते हैं ! इसके अलावा एक बड़ा मंदिर है जो लगभग यहां केंद्र में है और ऐसा लगता है कि सबसे पहले इसी मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया होगा ! वहां एक पुजारी जैसा केयर टेकर रहता है जिसे वेतन भी ASI से मिलता है ! जब हम पहुंचे तो हमारे और उसके अलावा और कोई भी नही था वहां और वो बन्दा नहा धोकर पूजा पाठ करने में व्यस्त था ! और एक हम थे , मुंह तक पर पानी नही मारा था , छिड़काव भी नही किया था ! फुर्सत मिलते ही वो हमारे पास आया और जितना वो जानता था हमें बताने लगा ! उसने हमें कुछ ऐसे भी फोटो दिखाए जो पुनर्निर्माण से पहले के थे और उसके साथ ही पुनर्निर्माण के बाद का भी फोटो लगा था ! इस तरह से दोनों फोटो को एक साथ रखकर तुलना करना सच में अच्छा लगता है !


जब हम बार निकले तो एक विष्णु मंदिर और है जो वास्तव में इन मंदिर समूहों से पहले पड़ जाता है लेकिन क्योंकि हम चल ही उल्टे रहे थे तो हमें ये बाद में मिला ! करीब तीस सीढियां चढ़कर इस मंदिर तक पहुंचे और इसकी बनावट देखकर मंत्रमुग्ध हो गए !


अब चलते हैं आगे पडावली गाँव में ! आज ज्यादा लिखने को कुछ था नहीं इसलिए फोटो ज्यादा हो सकते हैं ! और वैसे भी ऐसी जगह देखने में ज्यादा अच्छी लगती हैं , पढ़ने में ज्यादा कुछ रखा नही !! 
आइये फोटो देख कर चलते हैं :


अभी बहुत कुछ बचा है "खजाने " में


ज्यादातर मंदिरों की छत फ्लैट है



अभी बहुत कुछ बचा है "खजाने " में






ये वो कलाकृतियां हैं जो किसी मंदिर की शोभा बढ़ाने के लिए तत्पर हैं




ये ऊपर वाले मंदिर की "बैक साइड " है

यहाँ अभी छत भी नहीं पड़ी

विष्णु पद

ओह ! इतनी दुश्मनी



ओह ! इतनी दुश्मनी



ऐसा शिवलिंग देखा है पहले ?
















Work in Progress































































                                                                     
                                                                                              मिलते हैं जल्दी ही :
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