शनिवार, 14 मई 2016

Vishwanath Temple : Varanasi

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पिछली पोस्ट में पटना से पैसेंजर ट्रेन से वाराणसी दोपहर 2 बजे के आसपास पहुँच गया था ! शरीर की हालत ऐसी थी जैसे अभी अभी मजदूरी करके आया हूँ ! कपडे पसीने से कड़कड़ा गए थे क्योंकि गर्मी ने भी सोच लिया था कि आज इसे ही अपना शिकार बनाना है ! स्टेशन से बाहर आया और सीधे "सार्वजनिक शौचालय " में जा पहुंचा,  लेकिन वहां भीड़ देखकर आगे निकल गया ! मुझे पता था कि थोड़ा सा आगे बस स्टैंड के पास नहाने की सुविधा है ! 10 रूपये में नहाना हो गया ! और क्या चाहिए इस गर्मी में , और इस महंगाई के जमाने में ? आज का प्लान , राम रमापति बैंक देखना , बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन और अगर संभव हुआ तो रामनगर फोर्ट देखने चलेंगे !






राम रमापति बैंक :  सच बताइए , आपने इससे पहले कभी इस बैंक का नाम सुना है ? नहीं न ! ये बैंक असल में पैसा रुपया नहीं जमा करती बल्कि राम नाम जमा करती है ! जिस दिन मैं  बनारस पहुंचा था उस दिन मैंने वहां का लोकल अमर उजाला समाचार पत्र खरीदा था , उसमें इस राम रमापति बैंक की कुल जमापूंजी के विषय में भी खबर थी कि ये अब तक 19 अरब 47 करोड़ 23 लाख 12 हजार 300 राम नाम जमा कर चुका है ! मुझे भी राम नाम जमा करना था ! इसलिए वहां जाना ही था ! ये बैंक दशाश्वमेध घाट के बिलकुल पास है D5/35, Tripura Bhairwi, Dashashwamedh Ghat Rd, Varanasi, ये इसका पूरा पता है ! ये इसलिए लिखा है ताकि अगर आपका मन है तो आपको परेशानी न हो ! विश्वनाथ मंदिर के बिलकुल पास में एक गली है वहीँ है ये बैंक !

अब वापस अपनी बात पर आता हूँ ! मुझे इस बैंक में अपने राम नाम को जमा करना था ! ये राम नाम मेरी पत्नी ने 2007 में लिखा था और अब उसको उसकी सही जगह पहुँचाने का अवसर प्राप्त हो रहा था !

राम नवमी के पवित्र दिन शुरू हुई इस बैंक को अब 90 साल पूरे हो गए हैं ! इसे एक परिवार ही चलाता है ! दास कृष्ण चंद इसके मैनेजर हैं और आशीष कुमार महरोत्रा जी डिप्टी मैनेजर ! मैं डिप्टी मैनेजर साब से मिला ! बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं ! लेकिन दुर्भागयवश मेरा खाता इस बैंक में नहीं खुल पाया क्योंकि जिस व्यक्ति को राम नाम लिखना होता है उसे ये बैंक ही कागज़ , स्याही और अन्य सामान देता है और इसके साथ ही बहुत से ऐसे नियम भी होते हैं जो आसान नहीं होते ! उदहारण स्वरुप - सुबह जागते ही आपको राम नाम लिखना है ! प्याज , लहसुन नहीं खाना है आदि आदि ! ताज्जुब की बात ये कि इन सब नियमों के बावजूद भी दुनिया के करीब 89 देशों से हिन्दुओं के अलावा मुस्लिम , सिख , बौद्ध आदि धर्मों के लोग भी राम नाम लिखते हैं और पूर्ण रीति रिवाज़ से जमा करने आते हैं ! मुझे उन्होंने दुबई और ईरान से आये राम नाम को दिखाया भी था !

क्योंकि मेरा खाता इस राम रमापति बैंक में नहीं खुल पाया था तो अब मुझे अपने राम के नाम को गंगा में ही प्रवाहित करना होगा ! पोलुशन नहीं होगा -कागज़ ही तो है गल जाएगा !!


आइये अब बाबा विश्वनाथ जी के दर्शन को निकलते हैं ! लाइन बहुत लम्बी नहीं थी फिर भी एक घण्टा से ज्यादा लग गया ! साइड से कोई न कोई " VIP " बनके जल्दी दर्शन के लिए पहुँच जाता और हम वहीँ के वहीँ अटके रह जाते ! ऐसे मामलों में मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता , सोचता हूँ भगवान कोई भागा थोड़े ही जा रहा है कहीं , पहले इन जल्दी वालों को ही पुण्य कमा लेने दो ! ज्यादा पाप किये होंगे ! न मुझे दर्शन की जल्दी होती है न प्रसाद पाने की इच्छा ! भगवान ने जो दिया बहुत दिया है ! इसी प्रसाद के चक्कर में एक वहीँ का दूकानदार लड़ने को तैयार हो गया ! पहले तो सम्मान से बुला के कहने लगा -आप अपना बैग यहां रख दो , मेरे लॉकर में ! मैंने रख दिया और चाबी ले ली और चलने लगा ! बोला -प्रसाद तो लेते जाओ !! मैंने कहा भाई मुझे प्रसाद नहीं चाहिए , बस दर्शन करने हैं बाबा के ! बोला -ऐसे थोड़े ही होता है ! आज सोमावर है , बाबा का दिन है ! दूध , मिश्री और माला ! मैंने पूछा कितने का है , बोला -51 रूपये का ! मैं नहीं ले रहा भाई ! आखिर मुझे 20 रूपये की मिश्री लेनी ही पड़ी ! कैमरा -मोबाइल कुछ ले नहीं जा सकते ! तीन तीन जगह सुरक्षा जांच होती है !

बाबा विश्वनाथ का ये वर्तमान मंदिर औरंगजेब के तहस नहस करने के बाद अहिल्या बाई होल्कर ने 1780 ईस्वी में फिर से बनवाया था ! क्योंकि मोबाइल या कैमरा अंदर ले जाना पूर्ण प्रतिबंधित है इसलिए फोटो की उम्मीद करना बेमानी होगा ! इसकी जगह आपको साथ के साथ BHU के अंदर स्थित नए विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करा सकता हूँ ! लेकिन कुछ फोटो इंटरनेट से लेकर लगाना चाहता हूँ !

यहाँ से अब लंका चलते हैं ! लंका से ही राम नगर का किला देखने चलेंगे ! लंका वो रावण वाली लंका नहीं , बनारस की लंका ! बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी वाली जगह ! यहां से एक पीपे वाला पुल पार करके गंगा के उस पार चलेंगे ! उस पार मतलब रामनगर ! वो रामनगर जहां भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था !!


राम रमापति बैंक

राम का नाम आज भी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता है

राम का नाम आज भी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता है




विश्वनाथ मंदिर का प्रवेश द्वार , इससे आगे अभी बहुत चलना है

वो जा रहा है हमारा "राम " नाम



महामना , BHU के संस्थापक



नए विश्वनाथ मंदिर ( BHU के अंदर ) का द्वार



मंदिर के अंदर की सजावट देखते जाइये










नया विश्वनाथ मंदिर

नया विश्वनाथ मंदिर


नया विश्वनाथ मंदिर

नया विश्वनाथ मंदिर

नया विश्वनाथ मंदिर

नया विश्वनाथ मंदिर













अगली पोस्ट में गंगा पार करके राम नगर फोर्ट चलेंगे  :

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