शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

Let's Look towards North-East

उत्तर पूर्व की ओर 

पिछले शनिवार यानी 13 फरवरी को दिल्ली के प्रगति मैदान में नॉर्थ ईस्ट से सम्बंधित प्रदर्शनी देखने का अवसर मिला ! ये प्रदर्शनी 12 फरवरी से लेकर 14 फरवरी तक चली थी ! शनिवार को मेरा दिल्ली जाना होता है जापानी भाषा पढ़ने के लिए तो लौटते हुए यहां भी होकर आने का मन था ! साढ़े चार या पांच बजे के आसपास पहुँच गया ! ये हॉल नंबर 15 में था ! जल्दी जल्दी प्रगति मैदान के दो चक्कर लग गए ! कुछ दिन पहले ही "वर्ल्ड बुक फेयर " में गया था और अब इस प्रदर्शनी में जाना हुआ ! लेकिन अगर दोनों की तुलना करी जाए तो बुक फेयर में "टांग तोड़ " भीड़ थी और यहां आज भीड़ जैसा कुछ नहीं था ! टांग तोड़ मतलब बहुत ज्यादा !

बुक फेयर से दो किताबें लेकर आया था ! एक थी इंदौर के रहने वाले डॉ. अजॉय सोडाणी की "दर्रा दर्रा हिमालय " और दूसरी थी राकेश तिवारी की लिखी "डोंगी में डगमग " ! डॉ साब ने उत्तराखंड में स्थित "ओडोन कॉल " नाम के दर्रे को अपनी पत्नी और बेटे के साथ पूरा किया है ! उन्होंने लिखा है कि पांडवों के साथ द्रौपदी के इस दर्रे को पार करने के बाद उनकी पत्नी अपर्णा ने ही इसे पार किया है और इस उपलब्धि के लिए उनका नाम "लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स " में शामिल किया गया है ! एक बार पढ़ने लायक बुक है !

राकेश तिवारी जी ने अपनी किताब "डोंगी में डगमग " अपने उस अभियान का जिक्र किया है जब उन्होंने 1983 में दिल्ली से कोलकाता तक नाव से सफर पूरा किया ! उनके जज्बे और अभियान में आई मुश्किलों को झेलने की उनकी हिम्मत को प्रणाम करना चाहिए !


नॉर्थ ईस्ट की इस प्रदर्शनी में उधर के सभी सात राज्यों असम , मेघालय , मणिपुर , त्रिपुरा , नागालैंड , मिजोरम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों ने अपना भरपूर कौशल दिखाया ! एक ओपन थिएटर में संगीत का कार्यक्रम भी था लेकिन मुझे तलाश थी अपने मतलब की जगह की , यानि इन राज्यों में घुमक्कडी करने की जगहों के बारे में जानना ! भीड़ न होने का ही फायदा था कि जो चाय बुक फेयर में 30 रूपये की मिली थी आज सिर्फ 10 रूपये में मिल गई और वो भी हाथ की बनी हुई ! मशीन से बनी चाय में कतई मजा नही आता !


हॉल में घुसने से पहले बाहर कुछ स्टॉल और भी थे जिनमें कैन की लकड़ी से बनाये गए फर्नीचर और अन्य कलाकृतियां प्रदर्शित की गयी थीं ! अंदर एक दुसरे हॉल में "डूडल आर्ट " करके कोई प्रोग्राम हो रहा था जिसमे चित्रकार बहुत ही सुन्दर चित्रकारी कर रहे थे और उसके बिल्कुल बगल से एक अस्थायी कमरा बनाया गया था जिसे काले कपड़ों से तैयार किया गया था ! मुझे लगा कोई जादू टाइप होगा लेकिन अंदर एक बहुत ही विचित्र और अलग तरह का अनुभव मिला ! अंदर "डिजिटल आर्ट " के शानदार कारनामे दिखाई दे रहे थे जिन्हें आप फोटो में भी देख सकते हैं ! इनके अलावा वहां के कपड़ों की भी स्टॉल लगी थीं ! वहां से निकालकर मुख्य हॉल में प्रवेश किया ! एक स्टॉल पर मणिपुर में आईटी के प्रचार प्रसार को दिखाती प्रदर्शनी ने दिल जीत लिया ! कृषि अनुसन्धान और कैन तथा बम्बू अनुसन्धान के स्टॉल भी बहुत अच्छे लगे !


घुमक्कडी के शौक़ीन लोगों के लिए हर राज्य की तरफ से पूरी संतोषजनक जानकारी देने के लिए कुशल लोगों की पूरी टीम तैयार थी हर एक स्टॉल पर ! मणिपुर , सिक्किम और अरुणाचल के स्टॉल पर सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई दे रही थी जबकि मेघालय सूना सूना सा था ! थोड़ी देर बाद अरुणाचल के स्टाल से भीड़ छटी तो कुछ देखने को मिला ! मेरा मकसद अरुणाचल में भारतीय रेल के विस्तार को समझना था ! भारत में अब रेल नेटवर्क सिक्किम को छोड़कर सब राज्यों तक फ़ैल चुका है और ये एक तरह से हमारे जैसे गरीब घुमक्कड़ों के लिए हर्ष और गर्व का विषय है ! अरुणाचल प्रदेश में अब राजधानी ईटानगर तक ट्रेन उपलब्ध है ! नाहरलागुन नाम का स्टेशन बहुत खूबसूरत है जो ईटानगर से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है ! यात्रा जरूर करनी है यहां जल्दी ही ! अब नयी दिल्ली से नाहरलागुन तक सीढ़ी ट्रेन सेवा उपलब्ध है ! इसके अलावा अगर आप को ट्रैकिंग करने का शौक है तो उसके लिए भी बहुत से ट्रैकिंग रुट्स की जानकारी बताई जा रही थी ! 



आइये एक बार फोटो देख के जाते हैं :












एक बार ट्राय करने का मन तो है !!




ये भी कैन की लकड़ी का बना हुआ है




लालटेन स्टैंड ! लालटेन अब भी चलती हैं क्या ?

डूडल आर्ट में हाथ आजमाते चित्रकार


डिजिटल आर्ट

डिजिटल आर्ट

डिजिटल आर्ट



कैन की लकड़ी का एक और शानदार इस्तेमाल

ये भी कैन की लकड़ी का ही बना है !!


















Railway Network in North -East



Railway Network in North -East





NaharLangum Railway station Near Itanagar (Arunachal )






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