सोमवार, 7 जुलाई 2014

ट्रेन चली छुक छुक छुक छुक

इस वक्त भारत , रेलवे इतिहास में दिन प्रतिदिन एक नया अध्याय स्वर्ण अक्षरों में लिख रहा है ! आइये विश्व के चौथे सबसे बड़े इस नेटवर्क के विषय में और भी नयी पुरानी बातें जानते हैं ! शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने कभी न कभी ट्रेन से यात्रा न करी हो , ऐसे में और भी जरुरी हो जाता है कि  हम अपनी रेल के बारे में और भी अधिक जानें !


1 . भारत में अभी तक सबसे तेज चलने वाली ट्रेन: भारत में अभी तक सबसे तेज चलने वाली ट्रेन नयी दिल्ली - भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस है । पूरी तरह से वातानुकूलित ये सुपरफास्ट ट्रेन फरीदाबाद -आगरा सेक्शन में 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ती है और पूरी यात्रा में लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार बनाये  रखती है और 704 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है !

2. भारत में सबसे सुस्त ट्रेन : मेतुपलयम ऊटी नीलगिरि पैसेंजर ट्रेन को भारत की सबसे कम गति से चलने वाली ट्रेन  का तमगा मिला हुआ है , ये सवारी गाडी मात्र 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से रेंगती है , ये रफ़्तार भारत की सबसे तेज रफ़्तार गाडी से 10 गुना कम है ! इसी क्रम में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में वड़ोदरा में प्रताप नगर - जम्बूसर पैसेंजर ट्रेन आती है जिसकी अधिकतम गति 12 किमी / घण्टा है और 11 किमी / घंटा की औसत गति से 44 किलोमीटर की दूरी तय करने में पूरे 4 घंटे लगाती है !


रेलवे क्रॉसिंग पर मशक्कतः
इस धीमी ट्रेन के साथ एक और खास बात है। जब कोई क्रॉसिंग आती है, तो ट्रेन का सहायक ड्रायवर खुद उतरकर गेट बंद करता है और जब ट्रेन गेट से आगे निकल जाती है, तो वह वापस आकर गेट खोलता भी है, ताकि ट्रैफिक शुरू हो सके। गेट खोलने के बाद वह वापस इंजन में आता है और ट्रेन को आगे बढ़ाता है।

3. डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक चलने वाली विवेक एक्सप्रेस भारत में सर्वाधिक लम्बी दूरी तय करने वाली और सर्वाधिक समय लेने वाली ट्रेन  है ! ये अपने पूरे सफर में 4273 किलोमीटर की दूरी तय करती है !

4. और नागपुर से अजनी तक चलने वाली ट्रेन केवल 3 किलोमीटर की दूरी तय करती है , इसलिए इसे भारत की सबसे कम दूरी तय करने वाली ट्रेन  में शामिल किया जा सकता है ! असल में ये ट्रेन केवल रेलवे कर्मचारियों को नागपुर से अजनी स्थित वर्कशॉप तक लाने ले जाने के लिए है !

5 .सबसे लम्बी  नॉन स्टॉप यात्रा : त्रिवेन्द्रम -हज़रत निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस बिना रुके वड़ोदरा से लेकर कोटा तक की 528 किलोमीटर की यात्रा कराती है । इसी क्रम में दूसरे स्थान पर मुंबई - दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस आती है जो नयी दिल्ली और कोटा के बीच बिना रुके चलती है !


 6.   सबसे लम्बा स्टेशन का नाम :  चेन्नई के पास अराकोणम - रेणिगुंटा सैक्शन पर पड़ने वाला स्टेशन     " वेंकट नरसिम्हाराजुवारिपेटा " है !

7. सबसे छोटा स्टेशन नाम : इस लिस्ट में दो नाम आते हैं , 1 . पहला ओडिशा के झारसुगुड़ा के पास ईब और 2 . गुजरात के आनंद में पड़ने वाला ओद !

8. सबसे ज्यादा स्टॉप्स वाली ट्रेन : हावड़ा से अमृतसर के बीच चलने वाली ये  ट्रेन 115 जगहों पर रूकती है और इसके बाद नंबर आता है दिल्ली -हावड़ा जनता एक्सप्रेस का , जो 109 जगह रूकती है और फिर जम्मू तवी -सिआलदह एक्सप्रेस , जो 99 जगह रूकती है !

9. सबसे खराब ट्रेन : गुवाहाटी - त्रिवेन्द्रम एक्सप्रैस का समय से कुछ लेना देना नहीं है  ! ये ट्रेन 65 घंटे और 5 मिनट के निर्धारित समय से हमेशा  10 -12 घंटे लेट होती है !

10. एक ही लोकेशन पर दो स्टेशन : महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में श्रीरामपुर और बेलापुर अलग अलग दिशाओं में पड़ने वाले एक ही लोकेशन पर स्थित दो स्टेशन हैं !

11. सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव : WAG-9 भारतीय रेलवे के इंजन बड़े में सर्वाधिक शक्तिशाली लोकोमोटिव है ! 6530 हॉर्स पावर वाला ये महारथी गोमोह , अजनी , लालगुड़ा , तुगलकाबाद और भिलाई में अपना बेस बनाये हुए है ! इसके बाद नंबर आता है WAP - 7  का !

12.चारों दिशाओं के अंतिम स्टेशन : उत्तर दिशा का आखिरी स्टेशन जम्मू कश्मीर में बारामुला है , पश्चिम का आखिरी स्टेशन गुजरात के भुज में स्थित नलिया , दक्षिण का आखिरी स्टेशन कन्याकुमारी जबकि पूर्व का आखिरी स्टेशन तिनसुकिया ब्रान्च लाइन पर पड़ने वाला लेडो है !

13. सबसे ज्यादा ट्रेन चलाने वाला जंक्शन : उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा जंक्शन से 7  रूट पर गाड़ियां निकलती हैं ! आगरा कैंट के लिए ब्रॉड गेज लाइन , भरतपुर के लिए ब्रॉड गेज लाइन , अलवर के लिए ब्रॉड गेज लाइन ,  अछनेरा के लिए मीटर गेज लाइन , वृन्दावन के लिए मीटर गेज लाइन , हाथरस -कासगंज के लिए मीटर गेज लाइन ( अब ये ब्रॉड गेज में बदल गयी है ) ! इसके बाद नंबर आता है 6 सोर्सेज के साथ भटिंडा , पांच रूट  के साथ लखनऊ , गुण्टाकल , कटनी , वाराणसी , कानपूर , विल्लुपुरम , दभोई और नागपुर का !

14. सबसे ज्यादा पैरेलल ट्रैक्स : मुंबई में बान्द्रा टर्मिनस और अँधेरी के बीच 10 किलोमीटर में सात पैरेलल ट्रैक हैं जबकि सिल्लीगुड़ी स्टेशन पर तीन अलग अलग तरह के गेज मौजूद हैं !

15. सबसे व्यस्त स्टेशन : लखनऊ , जिस पर प्रतिदिन 64 गाड़ियां गुजरती हैं !

 
16. सबसे लम्बा प्लेटफार्म :    विश्व का सबसे लंबा प्लेटफार्म  पश्चिम बंगाल के खड़गपुर (अब गोरखपुर में है ) में है जिसकी लम्बाई 1072 . 5 मीटर है !

17. सबसे पुराना लोकोमोटिव : भारत ने अब तक भी अपने सबसे पुराने लोकोमोटिव को ऑपरेशन में रखा हुआ है ! सन 1855 ईस्वी में निर्मित फेयरी क्वीन इंजन को , जिसे गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में शामिल किया गया है , अभी तक चलायमान रखा गया है !

18 . कर्मचारियों की संख्या : भारतीय रेलवे 14 लाख कर्मचारियों के साथ भारत का सबसे बड़ा  और दुनिया का नौंवा सबसे बड़ा नियोक्ता है !

19. . रेलवे नेटवर्क : भारत 64 ,000 किलोमीटर की रेलरोड के साथ अमेरिका , रूस और चीन के बाद चौथे स्थान पर विराजमान है !

20 भाप के इंजन : भारत में भाप के इंजिनों का उत्पादब सन 1972 से बंद कर दिया गया है !

21 . तय की जाने वाली दूरी : भारतीय रेलवे की 14 , 300 ट्रेन प्रतिदिन इतनी दूरी तय करती हैं कि अगर वो चाँद पर जाने लगें तो प्रतिदिन पृथ्वी से चाँद तक के साढ़े तीन चक्कर लगाएंगी !

22 . शौचालय : भारतीय रेल में पहली बार प्रथम श्रेणी में 1891 में और अन्य श्रेणियों में 1907 में शौचालय की सुविधा प्रदान करी गयी !

23 . एयर कूलिंग : भारतीय रेल में सन 1874  ईस्वी में ग्रेट इंडियन पेनिन्सुलर रेलवे की प्रथम श्रेणी में उपलब्ध कराई गयी !

24 . सबसे लम्बी सुरंग : जम्मू कश्मीर की पीर पंजाल रेलवे सुरंग , जिसकी लम्बाई 11. 215 किलोमीटर है , दिसंबर 2012 में तैयार हुई है ! इससे पहले कोंकण रेलवे पर पड़ने वाली कार्बुदे सुरंग , जिसकी लम्बाई 6.5 किलोमीटर है , उसे सबसे लम्बी सुरंग का दर्ज़ा प्राप्त था !

25 . भूमिगत ट्रेन : भारत की पहली भूमिगत ट्रेन कोलकाता में चलाई गयी थी !

26 . कंप्यूटराइज्ड आरक्षण : सबसे पहले 1986 में नयी दिल्ली में कंप्यूटराइज्ड रिजर्वेशन की  गयी !

27 . विधुत चलित ट्रेन : तीन फरबरी 1925 को बॉम्बे वीटी और कुर्ला स्टेशनों के बीच पहली विधुत ट्रेन दौड़ाई गयी थी !

28 . गणतंत्र दिवस के दिन 1982 में शुरू की गयी ट्रेन पैलेस ओन व्हील्स में कुछ समय तक भारतीयों को नहीं घुसने दिया जाता था !

29. सबसे दर्दनाक हादसा : बिहार में 6 जून 1981 को हुई रेल दुर्घटना को भारतीय रेल इतिहास में सबसे भयंकर और दर्दनाक हादसा कहा जा सकता है ! इस दिन करीब 800 यात्रियों को ले जा रही पैसेंजर ट्रैन मानसी और सहरसा के बीच बागमती नदी के पल पर पटरी से उत्तर गयी जिससे ज्यादातर लोग नदी की तेज धार में गबाह गए और एक अनुमान के अनुसार 500 से लेकर 800 लोगों की जान चली गयी ! 200 शवों को ही ढूँढा जा सका था ! ये भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे बड़ा हादसा माना जाता है !


30 . ट्रेनों की कुल संख्या : भारतीय रेलवे की लगभग 19,000 ट्रैन प्रतिदिन पटरियों पर दौड़ती हैं जिनमें से करीब 12000 यात्री ट्रेन हैं जबकि 7000 मालगाड़ी हैं जो माल धुलाई के लिए प्रयोग में लाइ जाती हैं !






भारत की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन -भोपाल शताब्दी

भारत की सबसे धीमी वाली ट्रेन -प्रतापनगर -झाम्बुसार पैसेंजर

भारत की सबसे धीमी वाली ट्रेन नीलगिरि पैसेंजर

भारतीय रेलवे इंजीनियरों की कारीगरी
माता वैष्णो देवी कटरा जाने के लिए  तैयार ट्रेन

सबसे लम्बा प्लेटफार्म - खड़गपुर

सबसे लम्बा स्टेशन का नाम
भारत की शान -रेलवे



शाही सवारी - पैलेस ओन व्हील्स

पुराने दिनों की याद ताज़ा करती -फेयरी क्वीन




                                                                                   पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त 

सोमवार, 30 जून 2014

दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम ………………

संडे था ! सोचा था देर तक सोऊंगा ! लेकिन पता नहीं सबको मेरी तरह नींद क्यों नहीं आती , 7 बजे होंगे किसी ने मोबाइल बजा दिया ! लम्बा हाथ करके मोबाइल उठाया और हैल्लो करी तो उधर से अंग्रेजी में आवाज़ आई – कैन आई स्पीक टू मिस्टर योगी सारस्वत ? मैंने भी अंग्रेजी में ही बोल दिया – याह ! स्पीकिंग ! तब तक वो दोबारा बोल गया – दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम ……….. ! कौन यमराज ? यार मेरी नींद मत खराब करो ! मैं किसी यमराज को नहीं जानता ! और मैंने फोन काट दिया ! फ़ोन फिर घनघनाया ! मैंने दो बार तो नहीं उठाया , लेकिन जब वो लगातार बजता रहा तो उठा ही लिया !

हाँ – बोल भाई !

सर दिस इस यमराज कॉलिंग फ्रॉम …………………. !

यार बता भाई युवराज ! कौन सा युवराज बोल रहा है ? इंडियन टीम वाला , मेरे कॉलेज वाला या वो कोने वाला ? कौन सा युवराज ? नो सर ! दिस इज़ यमराज , नॉट युवराज ! भाई देख तू अब मेरा दिमाग मत खराब कर सुबह सुबह ! एक तो तूने मेरी नींद खराब कर दी और अब ये बेसिर पैर की बातें कर रहा है ! कौन है तू और क्या चाहता है ? जल्दी बता , मुझे अभी और सोना है ! और हाँ , हिंदी में बोल ! मुझे हिंदी आती है !
ओके ! सर ! मैं यमराज बोल रहा हूँ !
मेरा दिमाग झन्ना गया – अबे यार बता न कौन बोल रहा है ! नहीं तो मैं अब फोन काट दूंगा !
नो सर, प्लीज ! आप मेरी बात तो सुन लीजिये पहले ! सर मैं यमराज ही बोल रहा हूँ स्वर्ग से ! आपका टिकेट कन्फर्म हो गया है स्वर्ग का !
यार मेरा कौन सा टिकेट कन्फर्म हो गया है ? मैंने तो कोई टिकेट कराया ही नहीं ? फिर तूने कैसे कन्फर्म कर दिया ? अबे पागल समझा है क्या ? और कहाँ का कन्फर्म कर दिया स्वर्ग का ? अबे ऐसे मैं कौन कश्मीर जाने बैठा है ! बच्चो के स्कूल खुलने वाले हैं , तू पागल तो नहीं है कहीं ? मेरा कोई टिकेट विकेट नहीं है , कैंसिल कर दे अगर कर दिया है तो ! अब सो जाऊं ?
अरे सर ! हमें आना है आपको लेने के लिए ! आप तैयार रहिये ! आपके लिए सीट तैयार करी जा रही है !

अबे तुम बिलकुल ही पागल हो क्या ? गजब करते हो यार ! मैंने टिकेट लिया नहीं , मुझे मालुम नही कि मुझे कहीं जाना भी है और तुम हो कि कह रहे हो कि तुम मुझे लेने आ रहे हो ? तुम्हारे बाप का राज है क्या ? और जाने आने और दुसरे खर्च के पैसे कौन देगा , तुम्हारा फूफा ?

नहीं सर ! बाप और फूफा की कोई बात नहीं है ! आपको लाने के लिए न हमें पैसों की जरुरत है न आपको ! सब फ्री हो जाता है , मजे मजे में ! बस आप तैयार रहिये !

ओह ! तो ऐसे कहो न ! मेरा कोई ऑफर होगा ! मतलब मैंने कुछ जीता होगा , दो या तीन रात का फ्री ? ऐसा कुछ न ! चलो बताओ कब चलना है ? मैं फिर छुट्टियां डाल देता हूँ कॉलेज में !
नहीं सर ! अब आपको छुट्टियां लेने की कोई जरुरत नहीं !
सही कह रहे हो बेटा ! तुम हमारे बॉस को जानते नहीं हो ! चलो ठीक है , मुझे बता देना कब चलना है ! ओके ! और हाँ यार , ये नाम बदल लो ! यमराज ! ये कोई नाम है ? इससे तो युवराज ही कर लो !

सर मेरा यही नाम है ! आप मुझे अब भी पहिचान नहीं पा रहे ! मैं असली यमराज हूँ !
फिर मजाक !
नहीं सर ! आप कहो तो आपको आपकी पिछली जिंदगी का सब कुछ बता देता हूँ , तब तो आप मानोगे कि मैं असली यमराज हूँ ! और हकीकत में उसने सब बयान कर दिया ! दिल बैठ गया !
क्या -तुम सचमुच के यमराज हो ?

रुको ,एक मिनट !
फ़ोन बंद किया ! नंबर देखा ! अरे भगवान ! ये 50 डिजिट का नम्बर ! ये तो सच में ही यमराज है ! कॉल बैक करी – आवाज़ आई ! ये इस दुनियां का नम्बर नहीं है , कृपया नंबर जांच लें ! अब तो मैं पसीना पसीना !
इतनी देर में फिर उसका फोन आ गया !
ओह ! तो तुम मेरी सच्चाई पता कर रहे थे ! मैं कोई स्पेशल 26 का नकली सीबीआई अफसर नहीं हूँ ! तैयार रहना ! हम जल्दी ही आएंगे !

अरे सुनो तो भाई ! एक बात तो बताओ ! माना तुम यमराज हो , लेकिन यमराज तो सिर्फ संस्कृत या हिंदी बोलते हैं तुम अंग्रेजी क्यों बोल रहे हो ?
अब क्या है कि हिंदुस्तान में भी बहुत से लोगों को हिंदी या संस्कृत समझ में नही आती इसलिए हमारे यहां ये सिखाया जाता है कि भारत में भी अंग्रेजी से शुरुआत करो ! अब हमारे यहां भी 90 दिनों में अंग्रेजी सीखें वाले कोर्स चल रहे हैं !
हम्म्म !
और तुम ये फोन करके इन्फॉर्म कबसे करने लगे ?
ये भी जरुरी हो गया है अब ! होता क्या है कि अब बिना नंबर के बहुत से लोग अपना टिकेट काट लेते हैं , उनसे हमारा रजिस्टर मैंटेन करना मुश्किल हो जाता है इसलिए हम पहले से इन्फोम कर देते हैं जिससे सही आदमी सही जगह पर जाए !
हम्म्म्म !
अब तुम तैयार रहना !

अरे यार , सुनो तो ! सुनो ! कुछ ले दे के काम चल जाए तो ठीक है न ?
क्या ?
यार मेरी जगह कहीं और से उठा ले ! ले दे के मामला सुलझा ले यार ! अभी देखियो मुझे बहुत सारे ब्लॉग लिखने हैं यार ! जो तेरा बनता हो , मैं दे दूंगा !
उसने थोड़ी देर सोचा ! फिर बोला ! हाँ यार ! तेरे ब्लॉग तो मैं भी पढता हूँ , बढ़िया लिखता है ! चल तुझे थोड़ा टाइम और देता हूँ ! लेकिन मेरे लिए तुझे एक ब्लॉग लिखना पड़ेगा !
पक्का ! जरूर लिखूंगा !
लेकिन यार तेरी जगह किसका टिकेट कन्फर्म करूँ ? मुश्किल हो रही है !
मैंने धीरे से फुसफुसाया – ईराक से देख ले , मेरे जैसा एक आध तो मिल ही जाएगा !
अरे , हाँ ! सही आईडिया दिया तूने ! चल फिर ऐश कर ! मजे मार ! बाय
बाय ! धन्यवाद यमराज भाई ! बहुत बहुत धन्यवाद ……………. तेरी वजह से मुझे …………।
अबे अब चुप कर , मुझे भी रुलाएगा क्या ! चल मजे कर ! मैं ईराक निकलता हूँ अपना टारगेट पूरा करने !

मंगलवार, 17 जून 2014

अमां मियाँ हौज़ ख़ास नाम ऐसे ई नहीं है

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हौज़ ख़ास देश विदेश में आई आई टी के कारण ज्यादा फेमस है लेकिन इसी हौज़ ख़ास में देखने को , वीकेंड बिताने को बहुत  कुछ है ! हौज़ ख़ास तक मेट्रो लीजिये या फिर ग्रीन पार्क तक बस या टैक्सी जैसा मन करे वो लीजिये और एक दिन बढ़िया तरह से एन्जॉय करिये ! 

हौज़ मतलब पानी का टैंक या छोटी सी झील और ख़ास मतलब ख़ास लोगों के लिए ! ख़ास मतलब रॉयल , शाही लोगों के लिए ! साउथ दिल्ली के केंद्र में स्थित हौज़ ख़ास में आपको शहरी और ग्रामीण दौनों तरह का जीवन देखने को मिलेगा हालाँकि ग्रामीण जीवन ऐसा नहीं कि आप हौज़ ख़ास गाँव देख लें और ये अनुमान लगा लें कि उत्तर प्रदेश और बिहार के गाँव भी ऐसे ही होते होंगे ! हालाँकि मैं जब उस रास्ते पर पैदल पैदल जा रहा था तो वहां एक कूड़ा करकट इकठ्ठा करने का घर सा बना हुआ है , कुछ लोग उस गंदे कूड़े को नंगे हाथों से उठाकर ट्रक में भर रहे थे , कितनी भयंकर बदबू आ रही , राम राम ! कैसे कर लेते हैं वो ऐसा ? पेट की खातिर ? क्या और कोई तकनीक नहीं ! इतनी बुरी सड़ांध तो मेरे  उत्तर प्रदेश के गाँव से भी नहीं उठती होगी, पॉलिटिक्स की सड़ांध की बात नहीं कर रहा हूँ !
हौज़ ख़ास को सीरी फोर्ट में रहने वाले लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने 1296 ईस्वी से 1316 ईस्वी के बीच बनवाना शुरू किया था ! वो झील अभी तक जिन्दा है लेकिन उसके आसपास ज्यादातर या तो खँडहर हो चूका है या फिर कब्जाया जा चूका है लेकिन जो कुछ भी बचा है उसे ASI पूरी तरह संजोये रखना चाहती है ! हौज़ ख़ास गाँव और अन्य किसी गाँव में थोड़ा अंतर है ! अंतर ये है कि हौज़ ख़ास गाँव में आपको बीना रमानी जैसे डिज़ाइनर के बुटीक और टॉप लेवल के रेस्टोरेंट्स दिखेंगे , मॉडर्न लोग दिखेंगे ! फोटो शूट कराती मॉडल भी मिल सकती है ! मैं सौभाग्यशाली रहा क्यूँकि मैंने पहली बार ओपन में किसी महिला मॉडल का फोटोशूट होते हुए देखा ,  वो भी इतने कम कपड़ों में !  उस वक्त कुछ पल के लिए मुझे लगा कि मैं शायद हिंदुस्तान से बाहर हूँ ! यहाँ मेरी  मानसिकता गलत नहीं है , बल्कि मेरी मानसिकता गाँव की है ! खैर ! 

इसी हौज़ ख़ास गाँव के शुरू होने पर डियर पार्क और रोज़ गार्डन हैं ! डियर पार्क में आपको हिरन मस्ती करते हुए बहुत नजदीक से देखने को मिलेंगे ! इस डियर पार्क का नाम मशहूर समाज सेवी आदित्य नाथ झा के नाम पर ए. एन. झा डियर पार्क है । लेकिन अगर आप डियर पार्क के बिलकुल अपोजिट रोज़ गार्डन में ये सोचकर जा रहे हैं कि वहाँ  सारे तरह तरह के गुलाब  मिलेंगे तो फिर आपको निराशा होगी ! हाँ , वैसे घूमने लायक जगह तो है ये ! और जब गाँव को पार करते हैं तो लगभग आखिरी छोर पर है मशहूर हौज़ ख़ास झील और हौज़ ख़ास कॉम्प्लेक्स और उससे लगी हुई मीनारें और गुम्बद !

इसी रास्ते पर जगन्नाथ जी को समर्पित श्री नीलाचल सेवा संघ द्वारा निर्मित खूबसूरत मंदिर भी है ! आइये फोटो देखते हैं :

नीलचला मंदिर
नीलचला मंदिर की ऊपरी मंजिल

रात के समय प्रकश में नहाया नीलचला मंदिर
डियर पार्क
डियर पार्क में बहुत नजदीक से हिरणों को देखा जा सकता है




डियर पार्क में एक गमला टाइप कुछ लगा रखा है
डियर पार्क के सामने ही है रोज़ गार्डन
ये भी रोज़ गार्डन है


हौज़ ख़ास कॉम्प्लेक्स









इस कॉम्प्लेक्स में बच्चे म्यूजिक की प्रैक्टिस के लिए आते हैं , एक क्लिक

हौज़ ख़ास





                                                                                            जल्दी ही मिलेंगे एक और यात्रा वर्णन के साथ

गुरुवार, 29 मई 2014

Garden of Five Senses ( गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसस )


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गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसस घूमने के लिए मुझे दो बार जाना पड़ा ! पहली बार गया तो पता पड़ा कि शाम छह बजे तक ही खुलता है और मैंने अपनी कलाई घड़ी में देखा तो सवा छह बज रहे थे ! मतलब आना बेकार रहा |  लेकिन फिर भी इधर उधर देख कर और टिकेट की कीमत वगैरह पता करके चला आया ! तब टिकट 20 रूपया का था , यानी 18 अप्रैल 2014 को ! 

गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसस तक पहुँचना बहुत ही आसान है , बस महरौली -बदरपुर रोड पर स्थित साकेत मेट्रो स्टेशन पर उतरिये,  उसी साइड में थोड़ा सा चलिए और ऑटो लीजिये 20 रूपये में अकेले के लिए ! पैदल चलने की शक्ति और हिम्मत है तो ज्यादा नहीं बस 1 या डेढ़ किलोमीटर ही होगा ! मजे मजे में चलते जाइए , अफ्रीकन लडकियां दिखती रहेंगी नए नए फैशन के कपडे पहने हुए ! 

वहाँ जाने का अगला मौका मिला 2 मई 2014 को ! शुक्रवार का दिन था यानि पक्का था कि गार्डन खुला होगा ,सोमवार को बंद रहता है ! ये गार्डन ही क्या दिल्ली के ज्यादातर घमूने वाली जगहें सोमवार को बंद ही रहती हैं ! ये अच्छा भी है कि ज्यादातर जगहों पर लोग घूमने के लिए रविवार को जाते हैं इसलिए रविवार को सभी जगहें खुली रहतीं हैं ! 

कैमरा और मेट्रो कार्ड उठाया और निकल लिए गार्डन देखने ,  पांच इन्द्रियों वाला बाग़ ! इस जगह को सईद उल अज़ाब  गाँव के नाम से भी जाना जाता है ! इसे दिल्ली पर्यटन निगम ने बनाया तो ये सोचकर होगा कि दिल्ली के लोगों को घूमने , पिकनिक मनाने की बढ़िया जगह मिल जायेगी लेकिन मुझे नहीं लगता कि यहां कोई भी भला आदमी अपने बच्चों को लाता होगा घुमाने के लिए ! क्यों ? आगे पढ़ेंगे ! 

सन 2003 में शुरू हुए इस गार्डन को बनाने का उद्देश्य मानव को प्रकृति को समझने और महसूस करने के माध्यम के तौर पर रहा होगा ! पाँचों इन्द्रियों को दर्शाते चित्र आपको दिखेंगे ! मैं दोपहर में गया था वहां ! टिकट खिड़की पर पहुंचा तो जो टिकट 15 दिन पहले 20 रुपये का हुआ करता था वो 30 रुपये  का कर दिया था ! आया हूँ तो देखूंगा जरूर ! मैंने खिड़की में हाथ डाला और उसे कहा एक टिकट देना भाई ! बोला अकेले हो ? मैंने कहा हाँ ! उसने टिकट दे दिया , फिर दोबारा उसने पूछा अकेले ही हो , मैंने कहा हाँ भाई हाँ ! अकेला ही हूँ ! वो  मुस्कराया , मुझे ऐसा लगा ! भीड़ बिलकुल भी नहीं थी , शायद दोपहर की वजह से और गर्मी की वजह से ! 

अंदर चला गया , आधा टिकट गेट पर बैठे आदमी ने फाड़ लिया और आधा मुझे पकड़ा दिया ,बोला अकेले हो ? मैंने कहाँ हाँ ! थोड़ा ही अन्दर गया होऊंगा तो धीरे धीरे सब समझ आने लगा कि हर कोई ये क्यों पूछ रहा है - अकेले हो ? असल में मैं शायद एकमात्र आदमी या ये कहूँ घुमक्कड़ होऊंगा जो अकेला घूम रहा था , सबके साथ अपने अपने बॉय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड थे जो एक दूसरे को बाहों में भरे हुए घूम रहे थे ! खैर में उन दृश्यों को देखते देखते , कभी शर्माता हुआ , कभी इस कल्चर को महसूस करता हुआ , बुदबुदाता हुआ आगे निकल  मतलब के फोटो खेंच लेता ! बहुत घना लेकिन छोटे छोटे झाड़ झंकड़ों का ये जंगल बहुत बड़ा है और मैं जैसे जैसे इस जंगल में घुसता गया और मेरी आँखें शर्माने लगीं ! वो जो कुछ एक पति पत्नी घर के अंदर करते हैं , मुँह पर दुपट्टा डालकर या फिर झाडी के ऊपर दुपट्टा डालकर वो सब वो लोग कर रहे थे जिन्हें हम देश का युवा कहते हैं , जो एक दूसरे के बॉय फ्रेंड - गर्ल फ्रेंड होते हैं ! मैं गाँव से हूँ इसलिए शायद ज्यादा मॉडर्न नहीं हूँ !  मैं खुद शर्मा गया ! वहां से जितना निकलने की कोशिश करता उतना ही और अंदर जंगल में घुसता जाता और वहां हर जगह वो ही एक जैसे दृश्य , जैसे आज सबको अपनी मन मर्जी  करने की छूट मिली हुई हो ! आखिर में वहाँ काम कर रहे एक मजदूर से रास्ता पूछा और तब बाहर निकलकर आया ! ओह ! तो इसलिए वो पूछ रहे थे- अकेले हो ? और यही जवाब है ऊपर लिखे क्यों का ! 
आइये फोटो देखते हैं : 
पत्थरों को काटकर कारीगरों ने क्या खूबसूरत नमूने गढ़े  हैं , दिल से तारीफ निकलती है ! 

शनिवार, 24 मई 2014

Gandhi Smriti ( गाँधी स्मृति )

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तीस जनवरी मार्ग, नई दिल्ली, में पुराने बिड़ला भवन में स्थित गांधी स्मृति वह पावन स्थल है जहाँ पर 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की इह लोक लीला समाप्त हुई। इस भवन में महात्मा गांधी 9 सितम्बर, 1947 से 30 जनवरी, 1948 तक रहे थे। इस प्रकार पावन हुए इस भवन में गांधी जी के जीवन के अंतिम 144 दिनों की अनेक स्मृतियाँ संग्रहित हैं।  पुराने बिड़ला भवन का भारत सरकार द्वारा 1971 में अधिग्रहण किया गया और इसे राष्ट्रपिता के राष्ट्रीय स्मारक के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। 15 अगस्त, 1973 को इसे जनसामान्य के लिए खोल दिया गया । यहाँ संग्रहित वस्तुंओं में वह कक्ष है जिसमें महात्मा गांधी ने निवास किया था तथा वह प्रार्थना स्थल है जहाँ वह प्रत्येक दिन संध्याकाल में जन सभा संबोधित करते थे । इसी स्थल पर गांधीजी को गोलियों का शिकार बनाया गया। यह भवन तथा यहाँ का परिदृश्य उसी रूप में संरक्षित है जैसा उन दिनों में था।

इस जगह पर जाने के लिए न जाने कितनी बार सोचा होगा , लेकिन जब वहां पहुँचता तो कभी 5 बज गए होते तो कभी सोमवार पड़ जाता ! असल में मेरा हंगरी भाषा का कोर्स तीस जनवरी मार्ग के पास ही स्थित हंगरी कल्चरल सेंटर में चल रहा था जो सोमवार और शुक्रवार को 6 बजे शुरू होता है , तो ये दो ही दिन मुझे मिल पाते थे ! जबकि गाँधी स्मृति 5 बजे बन्द हो जाता है और सोमवार को साप्ताहिक अवकाश है उनका !  

आखिर कॉलेज की छुट्टी पड़ गयी शनिवार की और इस बार मन बना लिया कि अब तो देख के आना ही है गाँधी स्मृति को ! इसे देखने के बाद मैं ये कह सकता हूँ कि अगर आप अपने बच्चों को गांधी बाबा के विषय में बताना चाहते हैं  तो कम से कम एक बार उन्हें इस संग्रहालय में जरूर ले जाएँ ! इस संग्रहालय में महात्मा गांधी द्वारा यहाँ बिताए गए वर्षों के संबंध में  फोटोग्राफ, मूर्तियाँ, चित्र, भित्तिचित्र, शिलालेख तथा स्मृतिचिन्ह संग्रहित है। गांधीजी की कुछ निजी वस्तुएँ भी यहाँ सावधानीपूर्वक संरक्षित हैं। 


आइये फोटो देखते हैं







गाँधी स्मृति में लगी आकर्षक प्रतिमा
अहिंसा घण्टा
यहीं शहीद हुए थे महात्मा गाँधी 

30 जनवरी सन 1948 को शाम 5 बजकर 17 मिनट पर शहीद हुए महात्मा गांधी 




गांधी स्मृति में लगी एक फोटो में गांधी जी अपने बाल कटवा रहे हैं 

 महात्मा गाँधी के अलग अलग उम्र के फोटो
गाँधी स्मृति में लगी आकर्षक प्रतिमा


​शीशे में महात्मा
 महात्मा गांधी का बिड़ला हाउस में रुकने का लेखा जोखा