गुरुवार, 10 अगस्त 2017

Nandikund-Ghiyavinayak Trek : Nanu Chatti to Budha Madhmaheshwar (Day 2)

इस ट्रैक को शुरू से पढ़ने और पूरा शेड्यूल ( Itinerary ) जानने के लिए इच्छुक हैं तो आप यहां क्लिक कर सकते हैं !!



नानू चट्टी की सुबह खुशबू दे रही थी और सामने की पहाड़ियां श्रृंगार कर अपने यौवन को और भी गहरा रंग दे रही थीं ! चाय -पराठा लेकर साढ़े आठ- नौ बजे निकल चले अगली मंजिल की ओर ! अगली मंजिल मध्यमहेश्वर मंदिर होते हुए बूढा मध्यमहेश्वर पहुँचने की थी ! नानू चट्टी से मध्यमहेश्वर करीब 8 किलोमीटर और फिर वहां से बूढ़ा मध्यमहेश्वर ढाई - तीन किलोमीटर होगा । मतलब आज लगभग 10 किलोमीटर चलना है । ठीक है , चलते हैं ।
मैं जब गाजियाबाद से निकलने को था तो अपने कैमरे को फुल चार्ज करके ले जाना चाहता था लेकिन पता नहीं क्या हुआ कि कैमरा शार्ट सर्किट हो गया,  मतलब खराब हो गया तो रांसी से भट्ट साब का कैमरा लिया लेकिन उनका कैमरा सोनी का पी & एस कैमरा था जो पावर बैंक से चार्ज नहीं होता । लिमिटेड यूज किया फिर भी तीन दिन में बोल गया :)  इस ट्रैक में मैंने हर रोज़ शाम के समय टैण्ट में पूरे दिन की कहानी लिखी थी , आइये पहले वो पढ़ते हैं :

आज दिनांक 19 जून है और हम सुबह करीब 9 बजे नानू चट्टी से चलना शुरू हुए ! इससे पहले नाश्ता के समय एक बुरी खबर मिली कि कल चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया है ! कल ही अंदाजा हो गया था कि हार जायेंगे ! नानू चट्टी में जहां हम रुके थे , वहां एक आदमी के पास फिलिप्स का रेडियो था , उसी पर कमेंटरी सुन रहे थे लेकिन जब भारत के 6 विकेट आउट हो गए तो हम वहां से उठकर चले आये और अपने टैण्ट में आकर घुस गए !

नानू चट्टी 2200 मीटर की ऊंचाई पर है और मद्महेश्वर 3150 मीटर तथा बूढा मध्यमहेश्वर बिल्कुल 3400 मीटर की ऊंचाई पर ! ऐसे देखें तो 1200 मीटर की ऊंचाई चढ़नी है !

सुबह जब चले तो थोड़ी दूर सबके साथ चलता रहा लेकिन , जैसा हमेशा होता है , आखिर में पहुँचते पहुँचते सबसे पीछे हो जाता हूँ ! नानू चट्टी से करीब 2 किलोमीटर आगे मोकाम्बा चट्टी है जहां चाय - खाना -रहना हो जाता है ! एक घर है वहां ! सास - बहू मिलकर सब संभाल लेती हैं ! यहीं अमित भाई और श्रीकांत ने तो दूध लिया लेकिन हम तो हमेशा अपना प्रिय पेय चाय ही पिएंगे :) मोकाम्बा चट्टी से करीब 2  किलोमीटर आगे कुन चट्टी नाम की जगह है जहां शिखर प्रिंस होटल है और यहां भी चाय -खाना -रहना हो जाता है ! अलग अलग रेट लिखे हैं सब चीज के ! चाय -10 रुपया , मैग्गी -30 रूपये और रहना 50 रुपया प्रति व्यक्ति ! कुन चट्टी से मद्महेश्वर 3 किलोमीटर और आगे है और रास्ता पूरा जंगल से है ! मैं नानू चट्टी से सुबह करीब 9 बजे शुरू करके करीब 11 बजे कुन चट्टी पहुँच गया था ! वहां से 11 : 20 बजे फिर चल दिया और करीब एक बजे तक अकेला ही चलता रहा ! न इधर से कोई आया और न उधर से ! इस घने जंगल में सच कहूं तो मुझे डर लगने लगा था लेकिन रास्ता बना हुआ है तो वन्य जीव यहां नहीं होते , होते होंगे तो दिखाई नहीं दिया ! कुछ देर बाद जब ऊपर की तरफ से चार लड़के नीचे आते हुए दिखाई दिए तो मन को हिम्मत और प्रसन्नता दोनों मिले ! उनसे पूछा - अभी मध्यमहेश्वर कितना दूर है ? बोले -बस पांच मिनट ! हालाँकि मुझे दस मिनट लग गए और ठीक एक बजकर 10 मिनट पर मैं भगवान शिव के चरणों में पहुँच चुका था ! मैं मध्यमहेश्वर मंदिर के सामने खड़े होकर , हाथ जोड़कर अपने आपको भाग्यशाली समझ रहा था ! अमित भाई और श्रीकांत 12 बजे ही वहां पहुंच गए थे ! मैंने दर्शन किये , पूजा पाठ किया और अपने पिता , परिवार और दोस्तों के लिए प्रार्थना की ! मंदिर अत्यंत ही सुन्दर है !!


मद्महेश्वर मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर और 250 मीटर और ऊपर बूढ़ा मद्महेश्वर है , वहीँ जाना है हमें लेकिन उससे पहले एक एक हो जाए , समझ गए न क्या हो जाए ? अरे वही चाय यार !! चाय पीकर , बच्चों के साथ बैट- बॉल में हाथ आजमाए लेकिन नालायकों ने बैटिंग नहीं दी , बस फील्डिंग कराते रहे ! ऊँ हूँ , मैं नहीं खेल रहा ! मैं तो जा रहा हूँ बूढ़ा मध्यमहेश्वर ! मौसम साफ़ था लेकिन 100 मीटर चढ़ते चढ़ते बारिश शुरू हो गई जो जल्दी ही बंद हो गई लेकिन कुछ देर बाद फिर से बूंदा बांदी शुरू होने लगी ! हल्की बारिश के बीच ही बूढ़ा मध्यमहेश्वर मंदिर के सामने हाथ जोड़ गया , क्योंकि बादलों का रूप देखकर लग रहा था कि तेज़ बारिश आने की संभावना है ! बूढ़ा मध्यमहेश्वर से थोड़ा आगे जाकर बायीं तरफ मैदान है और हमें वहीँ आज अपना टैण्ट लगाना है ! यहां लोहे के दो पाइप लम्बाई में खड़े करके कुछ चिन्ह बनाया गया है , क्या है ? क्यों है ? नहीं मालूम !!

ठीक चार बजे हमने टैण्ट लगा दिए , लेकिन जैसे ही टैण्ट लगाए , झमाझम बारिश शुरू हो गई जो अब तक जारी है और अभी 5 बजकर 45 मिनट हो रहे हैं ! हम टैण्ट में ही घुसे पड़े हैं ,बाहर निकलने का कोई चांस नजर नहीं आ रहा ! भूख लगी है लेकिन पोर्टर कुछ बना ही नहीं सकता ! एक पारले - ग का बिस्कुट का पैकेट बैग में पड़ा था , मेरे नहीं श्रीकांत के :) , और उसे हम दोनों ने मिलकर उड़ा दिया ! 

थोड़ी देर के लिए जैसे ही बारिश रुकी तो निकल गए बाहर फोटो खींचने के लिए ! यहां से चौखम्बा और मंदानी सिस्टर्स बहुत बढ़िया तो नहीं लेकिन ठीक ठाक दिखाई दे रही थी लेकिन बुग्याल जबरदस्त लगे !! एकदम ग्रीन !! फिर से बारिश !! कब रुकेगी और कब कुछ खाने को मिलेगा !! मैं ये डायरी टैण्ट में पड़ा -पड़ा ही लिख रहा हूँ और बाहर जबरदस्त बारिश हो रही है !!

भगवान मध्यमहेश्वर की कहानी लिखना चाहता हूँ लेकिन आज की पोस्ट बड़ी होती जा रही है इसलिए मध्यमहेश्वर मंदिर की कहानी अगली पोस्ट में लिखूंगा !! रात को 9 बजे के आसपास बारिश रुक गई थी और खाना -वाना खाकर रात को 11 बजे तक आग तापते रहे ! सूखी लकड़ियां खूब मिल जाती हैं और आसपास मवेशी भी खूब चरते हुए दिखा देते हैं !!



बाकी बात अगली पोस्ट में  :


यही द्रश्य मुझे बार बार आकर्षित करते हैं 
  








जय श्री मध्यमहेश्वर 












































 मिलते हैं जल्दी ही :


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